मराठवाड़ा में बारिश का संकट; पानी की कमी से उद्योगों पर बढ़ेगा खर्च, ग्रामीण बाजार कमजोर होने का भी डर

Marathwada Rain Crisis: मराठवाड़ा में बारिश की कमी से खरीफ फसलों के साथ उद्योगों पर भी जलसंकट का खतरा बढ़ा है। पानी महंगा हुआ तो उत्पादन लागत बढ़ेगी और किसानों की आय घटने से बाजार प्रभावित होगा।
Marathwada Rain Crisis Industries Face Water Shortage
छत्रपती संभाजीनगर(सोर्सः AI)
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Industries Face Water Shortage And Rising Costs: मराठवाड़ा में मानसून की बेरुखी ने अब उद्योगों की चिंता भी बढ़ा दी है। बारिश की कमी से खरीफ फसलों पर असर पड़ रहा है, वहीं जलस्रोतों में अपेक्षित पानी जमा नहीं होने से आने वाले दिनों में उद्योगों के लिए जल उपलब्धता चुनौती बन सकती है।

क्षेत्र के वालूज, शेंद्रा और चिकलथाना जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में उत्पादन इकाइयां हैं। पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई तो उत्पादन लागत बढ़ने का दबाव बन सकता है। दूसरी ओर, किसानों की आय घटने पर ग्रामीण बाजार में खरीद क्षमता कमजोर होने की आशंका है। ऐसे में बारिश का संकट कृषि के साथ उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है।

जलस्रोतों पर बढ़ता दबाव

मराठवाड़ा में बारिश का वितरण असमान रहने के कारण कई क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश का खंड पड़ा है। इससे जलाशयों में अपेक्षित जलसंचय नहीं हो पाया। उपलब्ध पानी में पेयजल को प्राथमिकता देना प्रशासन की मजबूरी है। इसके बाद सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों के लिए पानी का नियोजन करना होगा।

छत्रपती संभाजीनगर जिले का वालूज, शेंद्रा और चिकलथाना औद्योगिक पट्टा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्र हैं। यहां ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, फार्मा सहित विभिन्न क्षेत्रों की इकाइयां कार्यरत हैं। उत्पादन की कई प्रक्रियाओं में पानी की जरूरत होती है। इसलिए जल उपलब्धता में कमी आने पर उद्योगों को वैकल्पिक स्रोतों और पुनर्चक्रित पानी पर निर्भरता बढ़ानी पड़ सकती है।

पानी महंगा हुआ तो बढ़ेगी उत्पादन लागत

जलस्रोतों पर दबाव बढ़ने की स्थिति में उद्योगों को अतिरिक्त पानी की व्यवस्था करनी पड़ सकती है। टैंकर या अन्य वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भरता बढ़ी तो उत्पादन खर्च भी बढ़ सकता है। इसका असर विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों पर अधिक पड़ने की आशंका है।

बड़े उद्योगों के पास पानी के पुनर्चक्रण और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए अपेक्षाकृत अधिक संसाधन होते हैं। इसके विपरीत एमएसएमई के लिए अतिरिक्त लागत उठाना कठिन होता है। पहले से कच्चे माल, बिजली और परिवहन की लागत से जूझ रहे इन उद्योगों के लिए जल संकट एक और दबाव बन सकता है।

खेत कमजोर हुए तो बाजार पर भी असर

मराठवाड़ा की औद्योगिक अर्थव्यवस्था का ग्रामीण बाजार से सीधा संबंध है। अच्छी फसल होने पर किसानों की आय बढ़ती है और दोपहिया वाहन, ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, निर्माण सामग्री तथा अन्य वस्तुओं की मांग बढ़ती है।

बारिश की कमी से सोयाबीन, कपास और मक्का जैसी खरीफ फसलों पर असर पड़ा तो किसानों की आय प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में बड़ी खरीदारी टल सकती है। इसका असर ग्रामीण दुकानदारों, डीलरों, परिवहन कारोबार और उत्पादन इकाइयों तक पहुंच सकता है।

रोजगार पर भी पड़ सकता है असर

औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय और आसपास के ग्रामीण इलाकों के हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। उद्योगों की उत्पादन गतिविधियों पर दबाव बढ़ने से नई भर्तियों और ठेका रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

परिवहन, खान-पान, सर्विस सेंटर और अन्य छोटे कारोबार भी औद्योगिक गतिविधियों पर निर्भर हैं। फिलहाल उद्योगों में बड़े पैमाने पर उत्पादन बंद होने जैसी स्थिति नहीं है। लेकिन बारिश की कमी और जलसंकट लंबे समय तक जारी रहा तो छोटे उद्योगों की मुश्किल बढ़ सकती है।

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बारिश पर निर्भरता कम करने की जरूरत

छत्रपती संभाजीनगर जिले में जलसंकट से निपटने के लिए उद्योगों में वर्षा पानी को जमा, पानी का पुनर्चक्रण और उपचारित पानी के पुन: उपयोग पर जोर देना जरूरी है। उत्पादन प्रक्रिया में पानी की खपत कम करने से भी प्राकृतिक जलस्रोतों पर दबाव घटाया जा सकता है।

प्रशासन को औद्योगिक क्षेत्रों की वर्तमान और भविष्य की जल जरूरतों का आकलन कर दीर्घकालीन जल प्रबंधन योजना तैयार करनी होगी। पेयजल और सिंचाई की प्राथमिक जरूरतों के साथ उद्योगों की आवश्यकता का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होगा।

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बारिश की कमी से दोहरा दबाव

मराठवाड़ा में बारिश की कमी का असर एक के बाद एक कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है। फसल कमजोर हुई तो किसान की आय घटेगी, आय घटी तो ग्रामीण बाजार की मांग प्रभावित होगी और पानी की कमी बढ़ी तो उद्योगों की उत्पादन लागत पर दबाव आएगा। यही दोहरा संकट क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का कारण बन रहा है।

इसलिए मानसून की स्थिति अब केवल कृषि के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं रह गई है। मराठवाड़ा की क्षेत्र की रफ्तार, रोजगार और स्थानीय बाजार भी बारिश और जलस्रोतों की स्थिति से जुड़े हैं। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति और जल जमा करने में यह तय करेगा कि उद्योगों पर इस संकट का असर कितना गहरा होता है।

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