महाराष्ट्र की अदालत  सांकेतिक फोटो - सोर्स-सोशल मीडिया
मुंबई

44 लाख से अधिक लंबित मामलों से दबाव में महाराष्ट्र की न्यायपालिका, हाई कोर्ट में भी हजारों केस अटके

Bombay High Court: महाराष्ट्र की अदालतों में 44 लाख से अधिक दीवानी व फौजदारी मामले लंबित हैं। जजों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से न्याय मिलने में देरी हो रही है।

रूपम सिंह

Bombay High Court Pending Cases Maharashtra: महाराष्ट्र में न्याय पाने के लिए आम लोगों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ रहा है। राज्य की विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में राज्य में 44,00,000 से अधिक दीवानी और फौजदारी मुकदमे लंबित हैं।

इनमें 36,77,000 दीवानी मामले और 7,26,000 फौजदारी मामले शामिल हैं। मुकदमों के लंबे समय तक लंबित रहने से आम पक्षकारों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है।

दीवानी मामलों की संख्या सबसे अधिक

लंबित फौजदारी मामलों में छोटे विवाद, चोरी, धोखाधड़ी से लेकर गंभीर अपराधों तक के प्रकरण शामिल हैं। वहीं, दीवानी मामलों में जमीन विवाद, संपत्ति विवाद, पारिवारिक विवाद और करार से जुड़े मामले बड़ी संख्या में हैं। दीवानी मामलों की बढ़ती संख्या के कारण समय पर निपटारा करना न्याय व्यवस्था के लिए चुनौती बन गया है।

न्यायाधीशों की कमी और सुविधाओं का अभाव

विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य की जनसंख्या के अनुपात में अदालतों में न्यायाधीशों के स्वीकृत पद पहले से ही कम हैं। इसके अलावा कई पद अभी भी रिक्त हैं। वहीं तहसील और जिला स्तर की अदालतों में तकनीकी सुविधाओं और आवश्यक बुनियादी ढांचे की कमी भी मामलों के निपटारे में बाधा बन रही है।

अपील और सुनवाई में लगने वाला समय बढ़ा रहा देरी

एक अदालत के फैसले के बाद उच्च न्यायालय में अपील और सुनवाई की प्रक्रिया में लगने वाले समय के कारण भी मुकदमे लंबे खिंच रहे हैं। ‘नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड’ के आंकड़ों के अनुसार, कई मामले 5 से 30 वर्षों तक लंबित हैं। उच्च न्यायालय और सत्र न्यायालयों के वकीलों का कहना है कि सुविधाओं की कमी और निपटारे की धीमी गति के कारण लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है।

मुंबई हाई कोर्ट में भी हजारों केस अटके

मुंबई उच्च न्यायालय ऑनलाइन सुनवाई शुरू होने के बाद न्याय प्रक्रिया में तेजी आई है, लेकिन लंबित मामलों की संख्या अभी भी हजारों में है। ‘नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के अनुसार, मुंबई उच्च न्यायालय में 2 लाख 43 हजार दीवानी मामले और 51,675 फौजदारी मामले लंबित हैं। इनमें 10 से 20 वर्षों से लंबित 17,778 मामले शामिल हैं।

न्याय व्यवस्था को गति देने के लिए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने, तकनीकी सुविधाओं के विस्तार और अदालतों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता जताई जा रही है।

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