Edible Oil Traders SOP Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में खुले खाद्य तेल की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को वापस लेने का एक बड़ा फैसला किया है। दरअसल, FDA द्वारा खाद्य सुरक्षा नियमों को सख्त बनाने के तहत खुले तेल की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया गया था।
इस आदेश के मात्र चार दिनों के भीतर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दखल देते हुए इसे रद्द कर दिया और मिलावटखोरी रोकने के लिए एक बीच का रास्ता निकालने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि मिलावटखोरों पर सख्त कार्रवाई की जाए, लेकिन इसकी वजह से गरीब जनता और छोटे व्यापारियों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में कई मंत्रियों ने इस बैन के साइड इफेक्ट को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं। शिवसेना मंत्री संजय राठौड़ ने इस मुद्दे को कैबिनेट में उठाते हुए कहा कि राज्य में कई ऐसे पारंपरिक और पारिवारिक व्यवसाय हैं, जो पीढ़ियों से खुले तेल के व्यापार में लगे हुए हैं।
उन्हें रातों-रात अपना काम समेटने के लिए नहीं कहा जा सकता। इस चिंता का समर्थन करते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी रेखांकित किया कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में सीलबंद या पैकेट वाला खाद्य तेल आसानी से उपलब्ध नहीं होता है। वहां की गरीब जनता और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग आज भी अपनी जरूरतों के लिए खुले तेल पर ही निर्भर हैं। ऐसे में इस कड़े फैसले का सबसे बड़ा असर गरीबों की जेब पर पड़ रहा था।
कैबिनेट बैठक में इन तमाम पहलुओं को सुनने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत दखल दिया। उन्होंने तुकाराम मुंढे के नेतृत्व वाले खाद्य सुरक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे एक व्यावहारिक मध्यम मार्ग तलाशें।
मुख्यमंत्री ने कहा, हम एफडीए को एक ऐसी SOP तैयार करने का निर्देश देंगे जो खाद्य तेल की गुणवत्ता सुनिश्चित करे और मिलावटखोरी को रोके, साथ ही पारंपरिक व्यवसायों को भी जारी रखने की अनुमति दे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खुला तेल पूरी तरह से मिलावट से मुक्त हो, लेकिन इसके लिए इन वैध पारंपरिक व्यवसायों को जबरन बंद न कराया जाए।
उल्लेखनीय है कि 20 अगस्त को एफडीए प्रमुख तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में एक सख्त आदेश जारी किया गया था। इस आदेश के तहत मिलावटखोरी और स्वच्छता के अभाव को देखते हुए यह अनिवार्य कर दिया गया था कि सभी खाद्य तेलों और वसाओं को केवल सीलबंद, टैम्पर प्रूफ और स्पष्ट लेबल वाले फूड-ग्रेड पैकेट में ही बेचा जाए।
एफडीए का कहना था कि खुले तेल में तेल के स्रोत, बैच नंबर या एक्सपायरी डेट जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां नहीं होती थीं, जिससे मिलावट की जांच करना मुश्किल होता था।
हालांकि, व्यापारियों के भारी विरोध और ऑल इंडिया एडिबल ऑयल ट्रेडर्स फेडरेशन द्वारा नासिक में की गई बैठक में आंदोलन की चेतावनी के बाद सरकार ने आम जनता और गरीबों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस फैसले को बदलने का निर्णय लिया। अब सरकार मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने के लिए एक नया नियम (SOP) बनाने की तैयारी कर रही है।