राज्य में लगभग 7,000 मेगावाट क्षमता की विकेंद्रीकृत सौर परियोजनाएं शुरू।
महाराष्ट्र के 50 स्थानों पर 10-10 मेगावाट क्षमता वाली बैटरी परियोजनाएं।
कुल 750 मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाओं से 1,500 मेगावाट-अवर ऊर्जा का लक्ष्य।
4,000 मेगावाट-घंटे क्षमता वाली अतिरिक्त बैटरी परियोजनाओं पर भी काम जारी।
Mahavitaran Battery Energy Storage System: राज्य की बिजली वितरण कंपनी महावितरण ने बैटरी के माध्यम से बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 के तहत कृषि सौर ऊर्जा परियोजनाओं से उपलब्ध अतिरिक्त बिजली और ग्रिड के माध्यम से मिलने वाली सस्ती सौर ऊर्जा को बैटरियों में संग्रहित कर शाम के समय बिजली की अधिकतम मांग के दौरान आपूर्ति के लिए 1,000 मेगावाट अवर क्षमता का लक्ष्य हासिल किया है।
देश में पहली बार विकेंद्रीकृत बिजली वितरण नेटवर्क से जुड़ी बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स के माध्यम से इतने बड़े स्तर पर बिजली उपलब्ध कराने का रिकॉर्ड महावितरण ने बनाया है।
मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव तथा महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर राज्य में मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।
इस योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 7,000 मेगावाट क्षमता की विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं। इन परियोजनाओं से उत्पादित बिजली का उपयोग कृषि पंपों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने के लिए किया जा रहा है। राज्य की सूखाग्रस्त परिस्थितियों में यह योजना महत्वपूर्ण साबित हुई है।
महावितरण ने दिन के समय उपलब्ध अतिरिक्त सौर ऊर्जा को बैटरियों में संग्रहित कर शाम को बिजली की अधिकतम मांग के दौरान इस्तेमाल करने के लिए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) योजना शुरू की है। इस योजना के तहत हाल ही में 500 मेगावाट क्षमता वाली बैटरी स्टोरेज व्यवस्था कार्यान्वित की गई है।
इससे दो घंटे तक बिजली आपूर्ति संभव होने से कुल 1,000 मेगावाट-अवर की ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। सीएमडी लोकेश चंद्र के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू की गई इस पहल का लाभ केवल कृषि उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य के सभी बिजली उपभोक्ताओं को इससे फायदा होगा।
राज्य में एलनीनो के प्रभाव से कम बारिश होने और अक्टूबर महीने में तापमान अधिक रहने के कारण बिजली की मांग बढ़ गई है। दिन के समय सौर ऊर्जा से पर्याप्त और अपेक्षाकृत सस्ती बिजली उपलब्ध हो रही है, लेकिन सूर्यास्त के बाद सौर ऊर्जा उत्पादन बंद होने से बिजली की मांग पूरी करने के लिए बाजार से महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है।
ऐसे समय में महावितरण की बैटरी स्टोरेज परियोजना राहत देने वाली साबित हो रही है। दिन में संग्रहित सौर ऊर्जा का शाम के पीक आवर्स में उपयोग करने से महंगी बिजली पर निर्भरता कम करने और उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
महावितरण ने कुल 750 मेगावाट क्षमता वाली बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं स्थापित करने की योजना शुरू की है। इनसे दो घंटे के दौरान कुल 1,500 मेगावाट अवर बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी। इसमें से 1,000 मेगावाट अवर की क्षमता का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य दिसंबर 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।
इसके अतिरिक्त, 4,000 मेगावाट-घंटे क्षमता वाली अन्य बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं पर भी काम प्रगति पर है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से शाम के समय बिजली की अधिकतम मांग को पूरा करने के लिए भरोसेमंद और किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
देश में विकेंद्रीकृत बिजली वितरण नेटवर्क से जुड़ी 1,000 मेगावाट-अवर क्षमता वाली बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं शुरू करने वाली महा वितरण पहली बिजली वितरण कंपनी बन गई है। महाराष्ट्र में कुल 50 स्थानों पर 10-10 मेगावाट क्षमता वाली बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण तकनीक है। इसके जरिए सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली को संग्रहित करके जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे न केवल सौर ऊर्जा का बेहतर उपयोग संभव होता है, बल्कि बिजली की अधिकतम मांग के समय आपूर्ति बनाए रखने और महंगी बिजली खरीदने की आवश्यकता कम करने में भी मदद मिलती है।
महावितरण की यह पहल महाराष्ट्र में स्वच्छ ऊर्जा के प्रभावी उपयोग, बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और उपभोक्ताओं को किफायती बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।