तुकाराम मुंढे व उनका सोशल मीडिया पोस्ट सोर्स: एक्स/@Tukaram_IndIAS
मुंबई

सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता को लेकर तुकाराम मुंढे दिया जवाब, बोले- अधिकारी आते-जाते रहते हैं लेकिन...

Tukaram Mundhe Social Media Popularity: महाराष्ट्र के IAS अफसर तुकाराम मुंढे ने सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा असली सुशासन प्रसिद्धी नहीं, बल्कि जनता का भरोसा है।

आकाश मसने

Tukaram Mundhe Social Media Post On Popularity: महाराष्ट्र के चर्चित और सख्त छवि वाले आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग के आयुक्त पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही उन्होंने पूरे राज्य में नियमों का उल्लंघन करने वालों और मिलावटखोरों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है। अपनी कड़क कार्यशैली और जनहितैषी फैसलों के लिए मशहूर मुंढे का जादू अब सोशल मीडिया पर भी सिर चढ़कर बोल रहा है।

अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर का पद संभालने के बाद से ही तुकाराम मुंढे अपने जबरदस्त काम करने के तरीके से ब्यूरोक्रेटिक सर्कल में एक अलग पहचान बनाने वाले IAS ऑफिसर तुकाराम मुंढे का एक पोस्ट हाल ही में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि पब्लिक सर्विस नाम कमाने का जरिया नहीं है, यह एक जिम्मेदारी है।

तुकाराम मुंढे ने सोशल मीडिया पर नेताओं को पछाड़ा

तुकाराम मुंढे सोशल मीडिया पर पॉपुलैरिटी में बड़े-बड़े नेताओं से आगे निकल गए हैं। उनके धमाकेदार परफॉर्मेंस की वजह से उन्हें लोगों से खूब रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसकी झलक अब सोशल मीडिया पर भी दिख रही है। मुंढे अब फॉलोअर्स की संख्या में बड़े नेताओं से भी आगे निकल गए हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स की संख्या और एंगेजमेंट रेट में महाराष्ट्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पीछे छोड़ दिया है।

इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी बात रखते हुए, तुकाराम मुंढे ने गुड गवर्नेंस का सही मतलब समझाया है। उन्होंने साफ राय दी है कि सोशल मीडिया पर पब्लिसिटी और तारीफ से ज्यादा जरूरी है सिस्टम पर जनता का भरोसा।

तुकाराम मुंढे का सोशल मीडिया पोस्ट

तुकाराम मुंढे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा "जनता का भरोसा, विजिबिलिटी नहीं। पब्लिक सर्विस पहचान की तलाश नहीं है। यह ज़िम्मेदारी के लिए कमिटमेंट है। विजिबिलिटी से ध्यान आ सकता है। सोशल मीडिया एक्शन को बढ़ा सकता है। लेकिन दोनों ही अच्छे गवर्नेंस का पैमाना नहीं हैं।

तुकाराम मुंढे ने आगे लिखा कि असली पैमाना यह है कि क्या नागरिक ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं, संस्थाएं ज्यादा जवाबदेह बनती हैं, और लोग भरोसा कर सकते हैं कि सिस्टम सही बात के लिए खड़ा होगा। मकसद पब्लिक का हित है। पैमाना पब्लिक का भरोसा है। मेरे लिए, गवर्नेंस आखिरकार संस्थाओं को मज़बूत करने के बारे में होना चाहिए, न कि लोगों को। एक ऑफिसर आ सकता है और जा सकता है। लेकिन एक भरोसेमंद संस्था को टिकना चाहिए।

MLC Election Results Live: सभी सीटों के परिणाम जारी, यहां देखें पूरी लिस्ट; नागपुर और वाराणसी में फंसा पेच

Cyclone Arnab Update: 150 किमी/घंटा की रफ्तार से चलीं हवाएं, अब इन राज्यों में बारिश की चेतावनी

6,337 वाली दवा अब 1,495 में मिलेगी, कैंसर की किन दवाओं के कितने घटे दाम? देखें लिस्ट

BIG BREAKING: CJP ने दिया कांग्रेस के 1 नवंबर की महारैली को समर्थन, अभिजीत दिपके ने किया ऐलान

Seva First Innovation: महाराष्ट्र में इनोवेशन चैलेंज की धूम, 7,952 नए विचार पेश; 30 अक्टूबर तक करें आवेदन