मुंबई के सैफी अस्पताल ने ट्रेनी डॉक्टर पर किया मानहानि का केस, सोशल मीडिया पर लगाया था उत्पीड़न का आरोप

Bombay High Court: सैफी अस्पताल ने ट्रेनी डॉक्टर आसिया खान पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। डॉक्टर ने सोशल मीडिया पर अत्यधिक काम और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे।
Bombay High Court: Saifi Hospital files defamation case against trainee doctor
प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स- सोशल मीडिया
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Saifee Hospital South Mumbai: दक्षिण मुंबई स्थित सैफी अस्पताल और जनरल सर्जरी की प्रथम वर्ष की प्रशिक्षु डॉक्टर आसिया खान लुकमान के बीच चल रहा विवाद अब बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंच गया है।

अस्पताल ट्रस्ट ने डॉक्टर के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। ट्रस्ट का आरोप है कि डॉक्टर की सोशल मीडिया पोस्ट और टिप्पणियों से अस्पताल तथा उसके चिकित्सकों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

डॉक्टर ने लगाए कई गंभीर आरोप

लुकमान ने अपनी सार्वजनिक टिप्पणियों में आरोप लगाया था कि अस्पताल में चिकित्सा प्रशिक्षुओं से निर्धारित नियमों के विपरीत लंबे समय तक काम कराया जाता है। उन्होंने रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न और दुर्व्यवहार जैसे आरोप भी लगाए थे। हालांकि, अस्पताल ट्रस्ट ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है।

अस्पताल ने काम और उपस्थिति पर उठाए सवाल

ट्रस्ट के अनुसार, विवाद की शुरुआत डॉक्टर के काम और उपस्थिति को लेकर हुई। लुकमान ने फरवरी में राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा के माध्यम से सैफी अस्पताल में नेशनल बोर्ड डिप्लोमा की जनरल सर्जरी प्रशिक्षु के तौर पर कार्यभार संभाला था।

अस्पताल का दावा है कि मार्च से मई के बीच डॉक्टर ने बिना अनुमति छुट्टियां लीं और 20 मई के बाद किसी मरीज की देखभाल नहीं की। ट्रस्ट ने यह भी आरोप लगाया कि ड्यूटी के दौरान वह कई बार अपने निर्धारित कार्यस्थल पर मौजूद नहीं थीं।

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NBE को भी भेजी गई शिकायत

मुंबई अस्पताल ने डॉक्टर के कथित आचरण से जुड़ी शिकायतें राष्ट्रीय चिकित्सा परीक्षा बोर्ड (NBE) को भी भेजने की बात कही है। इसके बाद लुकमान ने अस्पताल प्रबंधन पर मानसिक उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाते हुए अपनी शिकायतों को सार्वजनिक किया।

डॉक्टर के वकील ने रखा पक्ष

लुकमान के वकील का कहना है कि कार्यस्थल पर अनुचित व्यवहार और निर्धारित मानकों के विपरीत काम के घंटों के खिलाफ शिकायत करना मानहानि नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि डॉक्टर का उद्देश्य केवल सम्मानजनक माहौल में अपना प्रशिक्षण पूरा करना है।

फिलहाल दोनों पक्षों के आरोप और दावे अदालत के समक्ष हैं। मामले में अंतिम तथ्य और जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगा।

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