एकनाथ खड़से को कोर्ट से राहत (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
मुंबई

भोसरी लैंड स्कैम: एकनाख खड़से को हाई कोर्ट से मिली बड़ी राहत, बोले- मुझे फंसाया गया, मैंने तो 1500 करोड़...

Bhosari Land Scam Case: एकनाथ खडसे को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत। सत्र न्यायालय में आरोप तय करने पर 24 फरवरी तक रोक। पढ़ें क्या है कानूनी पेंच।

प्रिया जैस

Eknath Khadse High Court Relief: राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक और भाजपा के पूर्व नेता एकनाथ खडसे को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने भोसरी भूमि खरीद घोटाले के मामले में एकनाथ खडसे को यह राहत देते हुए सत्र न्यायालय में आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।

इसके चलते, इस मामले में खडसे परिवार के खिलाफ 13 तारीख को होने वाली आरोप तय करने की कार्यवाही स्थगित कर दी गई है। हाई कोर्ट ने पुणे के भोसरी भूमि घोटाला मामले में खडासे के खिलाफ सेशन कोर्ट में चल रही कानूनी कार्यवाही पर 24 फरवरी तक रोक लगा दी है।

भोसरी भूमि घोटाला मामला

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में 2018 में किए गए संशोधन को बॉम्बे हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच के समक्ष चुनौती दिए जाने को ध्यान में रखते हुए, हाई कोर्ट ने खडासे के खिलाफ सेशन कोर्ट में चल रही कानूनी कार्यवाही पर अस्थायी रोक लगा दी है। जस्टिस अश्विन भोबे ने निर्देश दिया है कि इस मामले को 24 फरवरी तक बॉम्बे हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच के समक्ष तत्काल पेश किया जाए।

भोसरी भूमि घोटाला मामले में खड़से के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1 डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, कानून में संशोधन के बाद इस धारा में बदलाव कर दिया गया है। इसके अलावा, खड़से की ओर से अधिवक्ता करनसिंह राजपूत ने यह तर्क भी दिया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन के पूर्वव्यापी प्रभाव का मुद्दा अभी भी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। अधिवक्ता करनसिंह राजपूत और अधिवक्ता आशीष वर्णेकर ने खडसे की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया।

खडसे ने पहले ही लगाया था फंसाने का आरोप

इस बीच, एकनाथ खडसे ने आरोप लगाया है कि पुणे में 1,500 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले का पर्दाफाश करने के कारण उनके खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराकर उन्हें भोसरी मामले में फंसाया गया है। हेमंत गावंडे और उनके साथियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पुणे के गोपोड़ी इलाके में स्थित 15 एकड़ सरकारी जमीन हड़पने की कोशिश की थी।

एकनाथ खडसे ने इस संबंध में कहा है कि उन्होंने 2014 में विपक्ष के नेता और बाद में मंत्री रहते हुए इस घटना का खुलासा किया था और उस जमीन को बचाया था, जिसके कारण गावंडे ने बदले की भावना से उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए।

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