ED Seizes 567 Crore Property Pearls Group: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PACL) मामले में एक बार फिर बड़ा चाबुक चलाया है। जांच एजेंसी ने गुरुवार को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के कड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे और रायगड जिलों में स्थित 567.45 करोड़ रुपये की 48 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।
ED के दिल्ली जोनल कार्यालय द्वारा की गई इस कार्रवाई में प्रतीक कुमार, अंश प्रतीक कुमार और बीमिंग इन्फ्राडेवलपर्स, गणराज प्रॉपर्टीज तथा ग्रीनफील्ड एस्टेट्स लिमिटेड जैसी कंपनियों के के नाम पर मौजूद 48 अचल संपत्तियों को जब्त किया है। जांच अधिकारियों के अनुसार, इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत 567.45 करोड़ रुपये से अधिक है।
इस ताजा जब्ती के साथ ही PACL घोटाले में ED द्वारा अब तक भारत और विदेशों में जब्त की गई कुल चल और अचल संपत्तियों का आंकड़ा बढ़कर लगभग 30,235.21 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
PACL घोटाले में ED ने यह जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा नई दिल्ली में दर्ज कराई गई एफआईआर के आधार पर की। CBI ने भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 120-B और 420 के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद जांच एजेंसी ने एक अवैध सामूहिक निवेश योजना चलाने में संलिप्तता के लिए 33 आरोपियों के खिलाफ मुख्य चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट अदालत में दाखिल की थीं।
CBI की चार्जशीट के अनुसार, आरोपी कंपनियों और व्यक्तियों ने एक बड़ी अवैध सामूहिक निवेश योजना चलाई। उन्होंने पूरे भारत में लाखों निवेशकों से कृषि भूमि की बिक्री और विकास के बहाने धोखाधड़ी से 48,000 करोड़ रुपए से ज्यादा जुटाए।
निवेशकों को कैश डाउन पेमेंट और किश्तों में भुगतान की योजनाओं के जरिए निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया और उनसे एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य दस्तावेजों जैसे गुमराह करने वाले कागजात पर हस्ताक्षर करवाए गए।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुताबिक, ज्यादातर मामलों में जमीन कभी नहीं दी गई, जिसके परिणामस्वरूप निवेशकों का लगभग 48,000 करोड़ रुपए का बकाया रह गया।
ईडी ने 2016 में इस मामले में 'एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट' (ECIR) दर्ज की और 2018 में चार्जशीट दायर की। इसके बाद 2022, 2025 और 2026 में विभिन्न आरोपियों के खिलाफ 6 सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की गईं।
ईडी ने आगे कहा कि प्रतीक कुमार को 20 अगस्त 2022 को दायर पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी (ए-13) बनाया गया था और स्पेशल कोर्ट ने 19 सितंबर 2022 के आदेश के जरिए इसका संज्ञान लिया था।
इसके बाद, स्पेशल कोर्ट ने 9 अप्रैल 2025 को प्रतीक कुमार के खिलाफ एक ओपन-एंडेड गैर-जमानती वारंट जारी किया। इन संस्थाओं का मालिकाना हक और नियंत्रण प्रतीक कुमार के पास है।
जांच से पता चला कि ये अचल संपत्तियां पीएसीएल से डायवर्ट किए गए फंड का इस्तेमाल करके खरीदी गई थीं। पीएसीएल ने मूल रूप से भोले-भाले निवेशकों से पैसा इकट्ठा किया था, इसलिए ये संपत्तियां अपराध से हुई कमाई मानी जाएंगी।
(एजेंसी इनपुट के साथ)