फडणवीस ने महायुति नेताओं को एकजुट रहने की सलाह दी।
कहा, एकता से अधिराज्य कायम होगा, बंटने पर गुलामी बढ़ेगी।
किसानों की मदद के लिए ₹6.33 करोड़ का धनादेश सौंपा गया।
Devendra Fadnavis Mahayuti Unity: विधान परिषद की 5 सीटों के हालिया चुनाव परिणामों के बाद महायुति के तीनों घटक दलों भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। खासकर भाजपा और शिवसेना के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
गठबंधन के नेता एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महायुति के नेताओं को एकजुट रहने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि यदि हम साथ रहेंगे, तभी अपना अधिराज्य कायम कर सकेंगे लेकिन आपस में बंट गए तो गुलामी की ओर बढ़ेंगे, फडणवीस छत्रपति संभाजीनगर में अपने जन्मदिन के अवसर पर आयोजित महानाट्य 'प्रौढ़ प्रताप पुरंदर' के विशेष मंचन में शामिल हुए। नागरिकों के लिए इस महानाट्य का निःशुल्क आयोजन किया गया था।
इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज्य संघर्ष और सामाजिक एकजुटता का उल्लेख करते हुए एकता का संदेश दिया। उनके इस बयान को महायुति में जारी खींचतान के बीच अहम माना जा रहा है।
फडणवीस ने कहा कि सामाजिक एकजुटता के बल पर ही शत्रुओं का मुकाबला किया जा सकता है। समाज में भेदभाव और विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए। सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने पर ही भगवा ध्वज की विजय होगी। उन्होंने भेदभाव रहित नए महाराष्ट्र के निर्माण के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज और संत-महात्माओं का आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सूखे की पृष्ठभूमि में किसानों को हिम्मत देने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संकट आने पर किसानों को निराश नहीं होना चाहिए। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और संघर्ष से उन्हें प्रेरणा लेनी चाहिए। इस अवसर पर किसानों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि से 6 करोड़ 33 लाख रुपये का धनादेश सौंपे जाने की जानकारी भी दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की स्थापना के लिए संघर्ष किया। समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट कर मावलों ने 'एक दिल' होकर लड़ाई लड़ी तभी स्वराज्य की नीव मजबूत हो सकी।
अठारह पगड़ जातियों के लोग एक साथ आए और सामूहिक शक्ति से बड़ी चुनौतियों का सामना किया। आज भी समाज के सभी घटक एकजुट रहे तो कोई भी बड़ी चुनौती असंभव नहीं है।
उन्होंने आदिलशाही, कुतुबशाही, निजामशाही और मुगलशाही का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास में देश और राज्य को कमजोर करने के प्रयास हुए।
धर्म और संस्कृति पर हमले हुए तथा महिलाओं पर अत्याचार किए गए। ऐसे कठिन दौर में छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की।