New Cabinet Rules 2026 CM Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र की सियासत में एक ऐसा प्रशासनिक बदलाव हुआ है जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। राज्य सरकार ने 51 साल पुराने नियमों को ताक पर रखकर नई नियमावली लागू की है, जिसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अब असाधारण शक्तियां प्राप्त हो गई हैं।
इस बदलाव के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या फडणवीस अब महाराष्ट्र के 'सुपर सीएम' बन गए हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग ने 14 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र शासकीय कार्य नियमावली, 2026 अधिसूचित की है, जिसने 1975 से चले आ रहे पुराने ढांचे की जगह ली है। इस नई नियमावली के तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को राज्य के किसी भी मंत्री के फैसले को पलटने का वीटो अधिकार मिल गया है।
हालांकि, इसके लिए एक शर्त रखी गई है मुख्यमंत्री को यह लिखित रूप में दर्ज करना होगा कि यह कदम जनहित में उठाया गया है।
इस बड़े बदलाव के पीछे एक दिलचस्प कानूनी कहानी है। साल 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक मंत्री के फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने 2023 में खारिज कर दिया था।
कोर्ट ने तब कहा था कि पुराने नियमों के तहत मुख्यमंत्री के पास विभागीय मंत्रियों के स्वतंत्र फैसलों में दखल देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इसी कानूनी 'खामी' को दूर करने के लिए अब 2026 के नए नियम लाए गए हैं, जो मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप को कानूनी मान्यता देते हैं।
नए नियमों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रशासनिक पकड़ को इतना मजबूत कर दिया है कि वे अब किसी भी विभाग से कोई भी फाइल या दस्तावेज मंगा सकते हैं। संबंधित मंत्री और सचिव के लिए मुख्यमंत्री को ये दस्तावेज सौंपना अब अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, अब कैबिनेट की औपचारिक बैठक के बिना भी 'सर्कुलेशन' के जरिए फैसले लिए जा सकेंगे, बशर्ते मुख्यमंत्री को ऐसा करना जरूरी लगे।
प्रशासनिक स्तर पर इसे भले ही सुधार कहा जा रहा हो, लेकिन राजनीतिक रूप से यह महायुति गठबंधन के लिए अग्निपरीक्षा साबित हो सकता है। जिस वीटो पावर का इस्तेमाल अब फडणवीस कर सकेंगे, वह कभी एकनाथ शिंदे के पास नहीं था।
विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से सत्ता का संतुलन पूरी तरह मुख्यमंत्री की ओर झुक गया है, जिससे गठबंधन के साथियों के बीच अंदरूनी खींचतान बढ़ना तय है।
इसके अलावा, नए नियमों में मुख्य सचिव और वित्त विभाग की भूमिका को भी प्रभावी बनाया गया है, जहां किसी भी वित्तीय आदेश के लिए वित्त विभाग की पूर्व सहमति को अनिवार्य कर दिया गया है। अब देखना यह होगा कि जब फडणवीस पहली बार अपने इस 'वीटो पावर' का इस्तेमाल करेंगे, तो महाराष्ट्र की राजनीति क्या नया मोड़ लेगी।