Development Plan For Pandharpur Pilgrimage: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को कहा है कि पंढरपुर तीर्थ क्षेत्र का विकास प्रारूप सभी हितधारकों को विश्वास में लेकर अंतिम रूप दिया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले 50 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह योजना बनाई जा रही है।
सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंढरपुर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए भीड़ का प्रबंधन आधुनिक तकनीक और डिजिटल टूल्स के माध्यम से किया जाएगा। स्थानीय नागरिकों, वास्तुकारों और जन प्रतिनिधियों के सुझावों को प्रारूप में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
पंढरपुर के प्राचीन मंदिरों और मठों को उनके मूल स्थान पर ही संरक्षित कर विकसित किया जाएगा। विकास कार्यों के दौरान प्रभावित होने वाले दुकानदारों और स्थानीय निवासियों के हितों का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।
सरकार की ओर से प्रभावित लोगों के उचित पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी और उन्हें उनकी सुविधा के अनुसार विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं, जमीन और संपत्ति से जुड़े प्रभावितों को मुंबई की तर्ज पर मुआवजा देने की व्यवस्था की गई है।
सरकार का उद्देश्य पंढरपुर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्वरूप को बनाए रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का विकास करना है, ताकि विकास कार्यों से स्थानीय लोगों के हित प्रभावित न हों और श्रद्धालुओं को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
इसी तरह हाई-पावर कमेटी की एक अन्य बैठक में 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक औंधा नागनाथ मंदिर के लिए 193.55 करोड़ रुपये तथा नागपुर के कल्याणेश्वर मंदिर के लिए 72.49 करोड़ रुपये के संशोधित प्रारूप को मंजूरी दी गई।
औंधा नागनाथ मंदिर की प्राचीन शिल्पकला का प्राकृतिक रंगों से संरक्षण किया जाएगा। इसके साथ ही पुणे के आंबेगांव में बन रहे 'शिवसृष्टि' ऐतिहासिक थीम पार्क के चौथे चरण के लिए 50 करोड़ रुपये का कोष स्वीकृत किया गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विश्वास व्यक्त किया कि ढांचागत सुविधाओं के साथ-साथ यह योजना भविष्य के आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिससे पंढरपुर अधिक सक्षम, सुरक्षित और श्रद्धालुओं के लिए सुगम बनेगा।