प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स- सोशल मीडिया
मुंबई

मुंबई में अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़, 669 सिम कार्ड और 100 मोबाइल के साथ 3 गिरफ्तार

Mumbai Cyber Cell: मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने कंबोडिया स्थित जालसाजों को फर्जी व्हाट्सएप खाते देने वाले अंतरराष्ट्रीय 'ओटीपी फार्मिंग' गिरोह का भंडाफोड़ कर 3 लोगों को गिरफ्तार किया।

रूपम सिंह

Mumbai Cyber Cell OTP Farming Scam Bust: मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह ‘ओटीपी फार्मिंग’ नामक ऑपरेशन के जरिए कंबोडिया में सक्रिय साइबर जालसाजों को फर्जी व्हाट्सऐप खाते उपलब्ध करा रहा था।

कार्रवाई मुंबई अपराध शाखा की पश्चिमी क्षेत्र साइबर पुलिस ने की। पुलिस उपायुक्त बजरंग बंसोड़े के मार्गदर्शन में की गई कार्रवाई के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उनकी पहचान प्रमोद कुमार उर्फ बिपिन, धर्मेंद्र गुप्ता और राजीव कुमार गुप्ता के रूप में हुई है।

669 सक्रिय सिम कार्ड और 100 मोबाइल जब्त

पुलिस ने आरोपियों के पास से 669 सक्रिय सिम कार्ड और 100 मोबाइल हैंडसेट बरामद किए हैं। जब्त मोबाइल में 91 कीपैड फोन और नौ स्मार्टफोन शामिल हैं। इसके अलावा एक सीपीयू, वाई-फाई राउटर, फिंगरप्रिंट स्कैनर, 120 मोबाइल बैटरियां और 20 चार्जर भी जब्त किए गए हैं।

पुलिस का दावा है कि आरोपी भारत से कंबोडिया स्थित साइबर अपराधियों को तकनीकी और रसद संबंधी सहायता उपलब्ध करा रहे थे। इस नेटवर्क के माध्यम से कथित तौर पर फर्जी व्हाट्सऐप खाते तैयार कर उन्हें साइबर जालसाजों तक पहुंचाया जाता था।

निवेश धोखाधड़ी से जुड़े तार

जांच में इस नेटवर्क के तार निवेश धोखाधड़ी से भी जुड़ने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, कंबोडिया स्थित जालसाज भारतीय नागरिकों को प्रतिष्ठित निवेश कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर व्हाट्सऐप पर संपर्क करते थे।

आरोप है कि शेयर बाजार में निवेश के जरिए अधिक लाभ का लालच देकर पीड़ितों को अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित किया जाता था। एक मामले में शिकायतकर्ता से कथित तौर पर 22.30 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में जमा करवाए गए।

तकनीकी जांच से नेटवर्क का खुलासा

इस मामले में पश्चिमी क्षेत्र साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज होने के बाद तकनीकी जांच शुरू की गई। पुलिस ने मोबाइल नंबरों, सिम कार्ड, व्हाट्सऐप खातों और अन्य डिजिटल सुरागों का विश्लेषण किया। इसी जांच के आधार पर कथित ओटीपी फार्मिंग ऑपरेशन और उससे जुड़े आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली।

मुंबई पुलिस के अनुसार, आरोपी राजीव गुप्ता पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) एजेंट के रूप में काम करता था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि सिम कार्ड और मोबाइल हैंडसेट किस नेटवर्क के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे तथा इस गिरोह से और कितने लोग जुड़े हैं।

पुलिस जब्त उपकरणों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई गई है।

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