मीठी नदी मामले में आरोपी रहे ठेकेदार को बीएमसी ने दिया ₹14 करोड़ का काम, कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना

BMC Mithi River Desilting Scam: मीठी नदी गाद निकालने में घोटाले के आरोपों से घिरी विर्गो स्पेशलिटीज को बीएमसी ने कानूनी राय लेकर पश्चिमी उपनगरों में ₹14 करोड़ का ट्रैश बूम ठेका सौंप दिया है।
BMC awards ₹14 crore contract to contractor previously accused in the Mithi River case
बीएमसी मीठी नदी गाद घोटाला , प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- सोशल मीडिया
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Mumbai Municipal Corporation EOW Mithi River Scam FIR: मीठी नदी की गाद निकालने के काम में मिलीभगत और बीएमसी को 65।54 करोड़ रुपये के नुकसान के आरोपों से जुड़े मामले में जिस कंपनी को पहले दो निविदाओं में अपात्र ठहराया गया था, उसी विर्गों स्पेशालिटीज प्राइवेट लिमिटेड को अब बीएमसी ने करीब 14 करोड़ रुपये का ट्रैश बूम संचालन एवं रखरखाव ठेका दिया है।

कंपनी के तत्कालीन निदेशक जय जोशी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद पहले उसे अपात्र किया गया था। हालांकि, इस बार कंपनी ने दावा किया कि एफआईआर उसके खिलाफ नहीं, बल्कि जोशी के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से दर्ज की गई है।

इसके बाद बीएमसी ने कानूनी राय लेकर कंपनी को तकनीकी रूप से पात्र मान लिया। बीएमसी ने 10 मार्च को पश्चिमी उपनगरों के 6 स्थानों पर ट्रैश बूम के संचालन और रखरखाव के लिए टेंडर जारी किए थे। चार कंपनियों ने इसमें बोली लगाई। विर्गों ने करीब 14 करोड़ रुपये की बोली लगाई, जो दूसरी सबसे कम बोली से लगभग 40 लाख रुपये कम थी।

30 जुलाई को कंपनी को दो वर्ष का ठेका मंजूर किया गया। टेंडर की पात्रता शर्त में स्पष्ट था कि ब्लैकलिस्ट किए गए या जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है, ऐसे ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकते। इसी शर्त के आधार पर मनपा ने विर्गों को इससे पहले कम से कम दो निविदाओं से बाहर किया था। विर्गो स्पेशलिटीज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का दावा, एफआईआर कंपनी के खिलाफ नहीं ये दोनों निविदाएं मनपा के हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग विभाग से संबंधित थीं।

इस बार विर्गों ने मनपा को दिए अपने प्रतिवेदन में कहा कि मीठी मामले की एफआईआर कंपनी के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके तत्कालीन निदेशक जय जोशी के खिलाफ व्यक्त्तिगत रूप से दर्ज है। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके वर्तमान निदेशक कृपा जय जोशी और केतन डेव के खिलाफ कोई मुकदमा लंबित नहीं है।

इसके बाद मनपा ने कानूनी विभाग से राय मांगी, बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कानूनी राय में कहा गया कि यदि किसी निदेशक के खिलाफ उसके व्यक्तिगत कृत्य को लेकर एफआईआर दर्ज है और कंपनी की जिम्मेदारी स्थापित नहीं हुई है, तो केवल इसी आधार पर कंपनी को अपात्र नहीं ठहराया जा सकता।

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65.54 करोड़ के नुकसान का आरोप

बता दें कि पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 6 मई 2025 को मिठी नदी गाद निकालने के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इसमें 2021-22 और 2022-23 के कामों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और मनपा को 65.54 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप है।

एफआईआर में जय जोशी के साथ मुंबई मनपा अधिकारियों, ठेकेदारों और मशीनरी आपूर्तिकर्ताओं के नाम भी शामिल है। जोशी को 7 मई 2025 को गिरफ्तार किया गया था और जून 2025 में उन्हें जमानत मिल गई।

BJP की नजर तिजोरी पर

राज्य के कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि भाजपा की नजर बीएमसी के तिजोरी पर है। 90,000 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपोजिट का इस्तेमाल करने के नाम पर उसे खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है।

करीब 30,000 करोड़ पहले ही खर्च किए जा चुके हैं। शेष राशि का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। सभी जमा राशियों को खत्म कर मुबई की वित्तीय ताकत को कमजोर करने की है।

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