FDA Tukaram Mundhe Milk Dairies Case: बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ ने अन्न व औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंढे को नेतृत्व में चलाए जा रहे मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने एफडीए की ओर से राज्य की 8 बड़ी दूध डेयरियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने एफडीए की कार्रवाई की कानूनी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
नियमानुसार सुधरने का मौका दिए बिना सीधे लाइसेंस सस्पेंड करने के लिए एफडीए को कटघरे में खड़ा किया गया है और कोर्ट ने इन 8 डेयरियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
इनमें जालना जिले की सरस्वती मिल्क प्रोडक्ट, छत्रपति संभाजीनगर की शिव कृपा डेयरी, जलगांव की सरस्वती मिल्क प्रोडक्ट, अहिल्यानगर जिले की कृष्णानंद फूड प्रोडक्ट, नवनाथ मिल्क कलेक्श, सिद्धेश्वर मिल्क प्रोडक्ट, जतिन मिल्क कलेक्शन और जयहारी मिल्क कलेक्शन का समावेश है।
इन डेयरियों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए थे। हर दिन हजारों लीटर दूध इकट्ठा करने वाली इन डेयरियों पर बैन लगने से इनसे जुड़े हजारों दूध उत्पादक किसानों के लिए बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया था। कोर्ट के इस फैसले से किसानों और डेयरी पेशेवरों को राहत मिली है।
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याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट में अपनी दलील पेश करते हुए एफडीए के नियमों का हवाला दिया। एफडीए के नियमों और आयुक्त की गाइडलाइंस के अनुसार यदि निरीक्षण के दौरान किसी डेयरी में कोई कमी पाई जाती है तो कानूनन व्यापारी को उसे ठीक करने के लिए 14 दिन का समय देना जरूरी है।
वकीलों ने पक्ष रखा कि बिना कोई समय सीमा दिए सीधे लाइसेंस निलंबित करने की एफडीए की कार्रवाई गैर-कानूनी और जल्दबाजी में की गई है। कई डेयरी ऑपरेटरों ने
बॉम्बे हाई कोर्ट में साबित किया कि निरीक्षण के बाद ज्यादातर खराबी पहले ही ठीक कर दी गई थी।