Bombay High Court (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)  
मुंबई

गांधी बापू पर निबंध लिखने वाले रेप के दोषी की कम हुई सजा, 5 साल की बच्ची के साथ की थी दरिंदगी

Bombay High Court Rape Sentence Reduced: बॉम्बे हाई कोर्ट ने 5 साल की बच्ची से रेप के दोषी की सजा 12 साल कर दी। कोर्ट ने जेल में उसके गांधीवादी अध्ययन व सुधार को आधार बनाया।

अनिल सिंह

Mahatma Gandhi Essay Prison Reform: बॉम्बे हाई कोर्ट का एक हालिया फैसला कानूनी गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अदालत ने 5 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के दोषी की उम्रकैद की सजा को घटाकर 12 साल कर दिया है। इस फैसले के पीछे कोर्ट ने दोषी की कम उम्र और जेल में उसके भीतर आए 'सुधारात्मक बदलावों' को मुख्य आधार बनाया है।

दिलचस्प बात यह है कि जेल में महात्मा गांधी के विचारों पर अध्ययन और निबंध लेखन में उसकी भागीदारी को कोर्ट ने सजा कम करने के लिए एक सकारात्मक संकेत माना। यह आदेश जस्टिस सारंग कोतवाल और जस्टिस संदेश पाटिल की खंडपीठ ने 2 फरवरी 2026 को आरोपी की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया।

सजा कम करने के पीछे कोर्ट के तर्क

बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोषसिद्धि (Conviction) को बरकरार रखा, लेकिन सजा की अवधि तय करते समय कुछ मानवीय और सुधारात्मक पहलुओं पर गौर किया:

कम उम्र और बैकग्राउंड: अपराध के समय आरोपी मात्र 20 वर्ष का था और उसका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।

लंबी कैद: वह दिसंबर 2016 से लगातार सलाखों के पीछे है और कोविड-19 जैसी विकट परिस्थितियों में भी उसे कोई पैरोल या रिहाई नहीं मिली थी।

सुधारात्मक प्रयास: जेल प्रशासन द्वारा प्रस्तुत प्रमाणपत्रों से पता चला कि दोषी ने गांधीवादी विचारों पर आधारित अध्ययन कार्यक्रमों और निबंध प्रतियोगिताओं में सक्रिय हिस्सा लिया।

सुधार बनाम सजा: न्यायपालिका का दृष्टिकोण

पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यद्यपि अपराध अत्यंत गंभीर और जघन्य श्रेणी का है, लेकिन कानून का एक उद्देश्य अपराधी में सुधार की संभावनाओं को तलाशना भी है। कोर्ट ने कहा, "इन सुधारात्मक पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 12 साल की सजा न्याय के उद्देश्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगी।" अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी द्वारा अब तक जेल में बिताई गई अवधि (लगभग 9 वर्ष) को इस 12 साल की सजा में समायोजित (Adjust) किया जाएगा।

केस की पृष्ठभूमि: 5 साल की पीड़िता की गवाही

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 9 दिसंबर 2016 की है, जब एक 5 वर्षीय बच्ची पानी भरने के लिए पड़ोसी (आरोपी) के घर गई थी। वहां आरोपी ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। ट्रायल के दौरान, अब 8 साल की हो चुकी पीड़िता ने अदालत में जो गवाही दी, उसे हाई कोर्ट ने 'अत्यंत विश्वसनीय' माना। कोर्ट ने पाया कि बच्ची का बयान बिना किसी सिखावन के और स्पष्ट था, जिसके आधार पर उसकी दोषसिद्धि को चुनौती नहीं दी जा सकी। हालांकि, 'गांधीवादी सुधार' के आधार पर मिली इस राहत ने सजा की कठोरता पर नई बहस छेड़ दी है।

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