BMC School Mid Day Meal Scheme Contract Controversy: बीएमसी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब तीन लाख विद्यार्थियों के मिड डे मील की गुणवत्ता और ठेका प्रक्रिया को लेकर गुरुवार को स्थायी समिति की बैठक में प्रशासन से तीखे सवाल पूछे गए।
ब्लैकलिस्ट में रह चुकीं और बिना रसोईघर वाली संस्थाओं को दोबारा करोड़ों रुपये के ठेके दिए जाने के मुद्दे पर सदस्यों ने नाराजगी जताई।
शिक्षा समिति की अध्यक्ष और स्थायी समिति सदस्य राजेश्री शिरवाडकर ने सवाल उठाया कि विद्यार्थियों के पोषण से जुड़े काम में ऐसी संस्थाओं को दोबारा मौका किस आधार पर दिया गया।
उन्होंने कहा कि कुछ संस्थाओं के निरीक्षण के दौरान वहां रसोईघर तक नहीं मिला। ऐसे में चयन के मानदंड और संस्थाओं की कथित अपात्रता से जुड़ी रिपोर्ट स्थायी समिति के सामने क्यों नहीं रखी गई, इसकी जांच होनी चाहिए।
राष्ट्रवादी कांग्रेस की डॉ. सईदा खान ने संस्थाओं को दी गई कथित नियमविरुद्ध समयावधि बढ़ोतरी को लेकर प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने संस्थाओं की पात्रता, अनुबंध अवधि और अनुभव प्रमाणपत्रों की जांच का विस्तृत विवरण समिति के सामने रखने की मांग की।
कांग्रेस के अशरफ आजमी ने भोजन की गुणवत्ता के साथ 147 समूहों के विभाजन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मिड डे मील का उद्देश्य केवल बच्चों का पेट भरना नहीं, बल्कि उन्हें निर्धारित मात्रा में कैलोरी और प्रोटीन उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने भोजन की नियमित गुणवत्ता जांच के लिए स्वतंत्र टीम गठित करने की मांग की।
सदस्यों की आपत्तियों के बाद अतिरिक्त मुंबई मनपा आयुक्त डॉ. अविनाश ढाकणे ने मिड डे मील की गुणवत्ता और स्वच्छता पर कड़ी निगरानी रखने का आश्वासन दिया। प्रशासन की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद संबंधित प्रस्ताव को स्थायी समिति ने मंजूरी दे