बीएमसी महापौर (सौ. डिजाइन फोटो ) 
मुंबई

BMC Mayor 2026: मुंबई को जल्द मिलेगा नया महापौर, बीएमसी में महायुति की सत्ता तय

Maharashtra News: बीएमसी में पिछले 15 दिनों से जारी सत्ता संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर है। सीएम फडणवीस और डिप्टी सीएम शिंदे की डिनर डिप्लोमेसी से महापौर और समितियों के बंटवारे पर सहमति बन गई है।

अपूर्वा नायक

BMC Mayor Election: मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में पिछले लगभग 15 दिनों से जारी सत्ता का संघर्ष अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है।

सूत्रों के अनुसार इस गतिरोध को तोड़ने में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच गुरुवार देर रात हुई 'डिनर डिप्लोमेसी' ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दावा ये भी किया जा रहा है कि डिनर टेबल पर महायुति के दोनों प्रमुख नेताओं के बीच हुई चर्चा में निकट भविष्य में बनने वाला मुंबई का महापौर के साथ-साथ स्थायी समिति सहित अन्य समितियों के अध्यक्ष पदों के बंटवारे का रास्ता भी साफ हो गया है।

माना जा रहा है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर भाजपा और शिंदे गुट के पार्षदों के एक संयुक्त समूह का आधिकारिक पंजीकरण कोकण भवन में कराया जाएगा। हाल ही में संपन्न बीएमसी चुनावों में बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) के गठबंधन वाली महायुति को मतदाताओं का समर्थन मिला था। लेकिन किसी भी दल या गठबंधन को अपने दम पर सत्ता काबिज करने योग्य बहुमत नहीं मिला था।

इसके बाद से ही भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) ने सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर पेंच फंस गया था। दोनों दलों के बीच बीते कई दिनों से रस्साकशी चल रही थी। लेकिन अब दावा किया जा रहा है कि गुरुवार की रात डीसीएम शिंदे और सीएम देवेंद्र डिनर (रात्रि भोज) पर मिले थे। इस दौरान हुई चर्चा में बीएमसी में सत्ता में हिस्सेदारी तय की गई।

महापौर की रेस में 4 नाम सबसे आगे

सूत्रों की माने तो महापौर पद के लिए फिलहाल चार महिला पार्षदों के नाम चर्चा के केंद्र में हैं। इनमें से किसके सिर मुंबई का ताज सजेगा, इसकी आधिकारिक घोषणा जल्द ही गठबंधन के शीर्ष नेताओं द्वारा की जाएगी।

गहन मंथन के बाद निर्णय

  • मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजों में बीजेपी के सबसे ज्यादा नगरसेवक चुने गए हैं। लेकिन इसके बाद भी वह अपनी सहयोगी शिवसेना (शिंदे गुट) की मदद के बगैर बहुमत सिद्ध नहीं कर पाएगी।
  • ऐसे में सत्ता के समीकरण बैठाने के लिए गहन मंथन के बाद दोनों नेता अंतिम निर्णय पर पहुंचे हैं।

राज्य सरकार ने अब बदले नियम

पुरानी परंपरा के अनुसार, नई सभा की पहली बैठक में महापौर का चुनाव होने तक कामकाज देखने के लिए 'पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया जाता था। यह सम्मान या तो पूर्व महापौर को या सभा के सबसे वरिष्ठ पार्षद को मिलता था। पीठासीन अधिकारी अपना हो, ठाकरे गुट ने मोर्चाबंदी की थी। ठाकरे गुट की नगरसेविका श्रद्धा जाधव का दावा मजबूत था। राज्य सरकार ने मनपा की सत्ता की लड़ाई में एक बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए पहले ही पुराने नियम को बदल दिया।

भूषण गगरानी होंगे पीठासीन अधिकारी

सरकार ने इस पुरानी व्यवस्था में बदलाव करते हुए यह जिम्मेदारी प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी को सौंपने का निर्णय लिया है। महापौर और उपमहापौर के चुनाव की प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए मुंबई नगर निगम के आयुक्त भूषण गगरानी को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है। अब कमिश्नर गगरानी की देखरेख में ही नए महापौर का चुनाव संपन्न होगा।

चार साल का लंबा इंतजार होगा खत्म

बीएमसी के पिछले सदन का कार्यकाल समाप्त हुए लगभग चार साल हो गए हैं। लंबे समय तक प्रशासक के शासन के बाद अब 'मुंबई को अपनी नई निर्वाचित सरकार' मिलने जा रही है। 'डिनर डिप्लोमेसी' के बाद बनी इस सहमति से अब यह साफ हो गया है कि अगले कुछ दिनों में मुंबई को अपना नया महापौर मिल जाएगा।

डीसीएम अजित के निधन से भी बदला माहौल

अजित पवार के निधन के कारण गमगीन हुए राज्य के सियासी माहौल ने मुंबई सहित अन्य मनपाओं के पेंच को सुलझाने में सहयोग मिला है। बैठक में सिर्फ बीएमसी ही नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक स्थिति पर भी विमर्श हुआ। अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में जो एक बड़ा शून्य पैदा हुआ है। उससे निपटने और आगामी चुनौतियों का सामना करने की रणनीति पर भी दोनों नेताओं ने विस्तार से बातवीत की।

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