Arvind Sawant Attacks Maharashtra Govt: महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों माझी लाड़की बहिन योजना को लेकर घमासान मचा हुआ है। शिवसेना ठाकरे गुट के सांसद अरविंद सावंत ने एक सनसनीखेज बयान देकर राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सावंत ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि मौजूदा सरकार ने जनता के पैसे का इस्तेमाल कर करोड़ों वोट खरीदे और अब चुनाव के बाद उन्हीं लाभार्थियों के साथ विश्वासघात किया जा रहा है।
अरविंद सावंत ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि माझी लाड़की बहिन योजना के तहत लगभग 92 लाख महिलाओं के नाम सूची से निरस्त कर दिए गए हैं। उन्होंने एक चौंकाने वाला गणित पेश करते हुए कहा कि इन महिलाओं ने योजना के प्रलोभन में आकर मौजूदा सरकार को वोट दिया था। सावंत के अनुसार, सिर्फ इन महिलाओं ने ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों ने भी सरकार के पक्ष में मतदान किया। अगर हम प्रति परिवार केवल तीन सदस्यों का भी हिसाब लगाएं, तो इसका मतलब है कि सरकार ने 2 करोड़ 70 लाख लोगों के वोट पैसे देकर लिए हैं।
ठाकरे गुट के नेता ने सरकार की मंशा पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे पीठ में छुरा घोंपना करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के लिए जनता के पैसे को अपनी पार्टी के प्रचार और वोट बटोरने में इस्तेमाल किया गया, जो कि संविधान के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है। सावंत ने यह भी खुलासा किया कि इस योजना में भारी अनियमितताएं हुई हैं, जहां महिलाओं के लिए बनाई गई योजना का लाभ पुरुषों ने भी उठाया है।
अरविंद सावंत ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि महाराष्ट्र आज भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य का कर्ज उसकी कुल आय के 100% से भी ऊपर जाने की कगार पर है। उन्होंने सीएजी की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें सरकार की कई खामियों को उजागर किया गया है, जिन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, सरकार मूल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने में माहिर है।
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यह हमला केवल एक योजना तक सीमित नहीं है। गौरतलब है कि शिवसेना ठाकरे गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर NEET पेपर लीक और युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे अन्याय पर सरकार को घेरा है। ठाकरे ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और NEET के खिलाफ आवाज उठाने वाले अभिजीत दीपके का समर्थन करते हुए विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील की है। अरविंद सावंत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र विधानसभा सत्र के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। अब देखना यह है कि सत्ता पक्ष इन गंभीर आरोपों और आर्थिक आंकड़ों पर क्या सफाई देता है।