महायुति गठबंधन में भाजपा और शिवसेना के बीच तनातनी जारी है।
500 करोड़ का ऑडियो लीक, प्रदीप पूर्णेकर हत्याकांड और MLC चुनाव के बीच खींचतान बढ़ी।
अमृता फडणवीस ने कहा- देवेंद्र फडणवीस को निशाना बनाया जा रहा है।
BJP Vs Shiv Sena Tension: महाराष्ट्र में सत्ताधारी गठबंधन महायुति में जारी तनातनी के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का पत्नी अमृता फडणवीस का बयान सामने आया है। अमृता फडणवीस ने रविवार को कहा कि राज्य में सूखे की स्थिति, पार्टी के अंदरूनी कलह और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावों के मद्देनजर, विपक्ष जानबूझकर देवेंद्र फडणवीस को निशाना बना रहा है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में एक बार चर्चाएं तेज हो गई है कि क्या सच में महायुति यानी भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में सबकुछ ठीक है या नहीं।
यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से भाजपा और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच तनाव है। दोनों ही पार्टियों के नेता एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस का बयान आने से फिर एक बार सवाल खड़े हो गए हैं। आइए समझते हैं कि दोनों पार्टियों के बीच तकरार क्यों बढ़ रही हैं।
इसकी शुरुआत होती है शिवसेना नेताओं के बयानों से। शिवसेना के कई नेता अलग-अलग मंचों पर एकनाथ शिंदे को एक बार फिर से महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाने की बात कह चुके हैं। यह बात भाजपा को नागवार गुजरती है।
इसी बीच मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल आरोप लगाते है कि भाजपा नेताओं के बीच चर्चा है कि साल 2024 में मराठा आरक्षण के लिए हो रहे आंदाेलन को खत्म करने के लिए शिवसेना ने भाजपा से 500 करोड़ रुपए लिए थे। मनोज जरांगे का आरोप है कि शिवसेना ने मेरे नाम पर भाजपा से 500 करोड़ रुपए लेकिन वह मेरे तक नहीं पहुंचे।
इसके बाद मनोज जरांगे ने एक ऑडियो क्लिप जारी की थी, जिसमें एक महिला कह रही है कि पैसे एकनाथ शिंदे के बेटे सांसद श्रीकांत शिंदे के जरिए मनोज जरांगे तक पहुंचाना है। इसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति में सियासी बवंडर आ जाता है।
पूरा विपक्ष एकनाथ शिंदे की शिवसेना और महायुति सरकार पर हमलावर हो जाता है। इधर विवाद बढ़ता देख मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस विवादित ऑडियो क्लिप की जांच के लिए SIT गठित करने के निर्देश दे देते हैं।
शिवसेना नेता रामदास कदम ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए भाजपा के कुछ नेताओं की मिलीभगत का आरोप लगाया। कदम ने सवाल उठाया कि क्या भाजपा के कुछ तत्व उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को हाशिए पर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। अपने दावों को पुष्ट करने के लिए उन्होंने भाजपा नेता प्रसाद लाड और मनोज जरांगे पाटिल की साथ में भोजन करते हुए तस्वीरें प्रसारित कीं।
मनोज जरांगे के आरोपों वाला विवाद अभी ठंडा भी नहीं हुआ। इसी बीच ठाणे में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना यूबीटी के नेता प्रदीप पूर्णेकर की हत्या हो जाती है। शिंदे गुट के नेता और ठाणे की पूर्व महापौर मीनाक्षी शिंदे और उनके पति पर इस हत्याकांड की साजिश रचने और मुख्य आरोपी होने के आरोप लगते है। इससे भी शिंदे की शिवसेना बैकफुट पर आ जाती है।
इस मामले में शिवसेना के दोनों गुट आमने सामने है, लेकिन भाजपा ने इस मामले में चुप्पी साध ली है। भाजपा ने शिवसेना के समर्थन में अब तक कोई बयान नहीं दिया है। इससे भी शिवसेना और भाजपा में अनबन के संकेत मिलते हैं।
वहीं तीसरी ओर महाराष्ट्र विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्राें की 5 सीटों पर अक्टूबर में चुनाव होते हैं। इसमें महायुति गठबंधन को केवल 2 सीटों पर जीत मिलती है, वहीं विपक्षी महाविकास आघाडी 3 सीटों पर अपना कब्जा जमाया। इस हार के बाद भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने अपनी ही सहयोगी शिवसेना पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। इसके बाद दोनों ही दलों में तल्खी और बढ़ गई।
नवनाथ बन को जवाब देने के लिए निलेश राणे सामने आए। निलेश राणे ने भाजपा प्रवक्ता के लिए सख्त लहजे का इस्तेमाल करते हुए कहा कि एकनाथ शिंदे के बारे में बाेलते समय अपनी हैसियत में रहना। विवाद इतना बढ़ गया कि एकनाथ शिंदे को खुद इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा। शिंदे ने अपने नेताओं को महायुति और साथी दलों के बारे में बात करते समय मर्यादा का पालन करने की हिदायत दी।
इन सब घटनाक्रमों को देखते हुए महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में चर्चा है कि दोनों दलों के बीच सबकुछ ठीक नहीं है। इसी बीच अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के भीतर सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है और मुख्यमंत्री को अस्थिर करने की कोई कोशिश नहीं हो रही है।
जब उनसे इस बारे में पूछा गया कि महाराष्ट्र में अब तक कोई महिला मुख्यमंत्री नहीं बनी है, तो अमृता फडणवीस ने कहा कि राजनीति में नेतृत्व का चुनाव योग्यता के आधार पर होना चाहिए, न कि इस आधार पर कि व्यक्ति पुरुष है या महिला। अगर महिलाएं अच्छा काम करती हैं, तो वे अपनी जगह खुद बना लेंगी।