

MLC चुनाव में हार के बाद भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच बयानबाजी तेज।
शिवसेना विधायक निलेश राणे ने भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन को औकात में रहने की चेतावनी दी।
एकनाथ शिंदे ने पार्टी प्रवक्ताओं और नेताओं को बयानबाजी बंद करने की हिदायत दी।
Shiv Sena Vs BJP On MLC Election: महाराष्ट्र में विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की पांच सीटों पर आए चुनाव नतीजों के बाद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर आंतरिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है। नतीजे आने के बाद महायुति में शामिल भाजपा और एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन के आरोपों पर शिवसेना विधायक निलेश राणे ने तीखा पलटवार किया है। राणे ने नवनाथ बन को औकात में रहने की हिदायत दी।
महाराष्ट्र में विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की पांच सीटों पर हुए चुनाव में महाविकास अघाड़ी (MVA) ने स्नातक वर्ग की तीनों सीटों पर शानदार जीत दर्ज की, जबकि महायुति को केवल शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की दो सीटों से ही संतोष करना पड़ा।
पुणे स्नातक सीट पर भाजपा उम्मीदवार की हार के बाद भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने शिंदे पर असहयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि शिवसेना ने पुणे और नागपुर में महायुति का साथ नहीं दिया। भाजपा के इस खुले आरोप के बाद शिंदे सेना के नेता उग्र हो गए और दोनों पक्षों के बीच बयानों का तीर चलने लगा।
इसी विवाद में शिवसेना विधायक निलेश राणे ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए मामले को और गर्मा दिया। निलेश राणे ने नवनाथ बन को निशाने पर लेते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सख्त लहजे में लिखा, "नवनाथ बन, शिंदे साहब पर बोलते समय अपनी औकात में रहा करो। तुम्हारी हैसियत क्या है और तुम बात क्या कर रहे हो?" राणे के इस आक्रामक बयान के बाद गठबंधन के भीतर तनाव चरम पर पहुंच गया।
महायुति में बढ़ते दरार और सार्वजनिक तौर पर खींचतान को देखते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा। गुरुवार देर रात शिवसेना नेताओं और पदाधिकारियों के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में शिंदे ने नाराजगी जाहिर की और सभी को संयम बरतने की हिदायत दी।
एकनाथ शिंदे ने अपनी पार्टी के प्रवक्ताओं और नेताओं को सख्त निर्देश दिए कि वे मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर मित्र दल भाजपा के खिलाफ कोई भी बयानबाजी न करें। उन्होंने कहा कि यह समय आपस में उलझने का नहीं बल्कि महायुति के रूप में आत्मचिंतन करने का है। जो गलतियां और कमियां इस चुनाव में रही हैं, उन्हें सुधारा जाएगा ताकि भविष्य में इनकी पुनरावृत्ती न हो।
शिंदे ने आगे कहा कि आपस में विवाद पैदा करने से केवल विपक्ष को फायदा पहुंचेगा। उन्होंने स्थानीय पदाधिकारियों से चुनाव नतीजों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और स्पष्ट किया कि सभी कमियों पर महायुति समन्वय समिति और शीर्ष नेताओं की बैठक में चर्चा की जाएगी। फिलहाल, शिंदे के इस कड़े रुख के बाद पार्टी नेताओं को शांत रहने और फिर से एकजुट होकर काम में जुटने का आदेश दिया गया है।
भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि "शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में महायुति का हिस्सा रही शिवसेना ने पुणे और नागपुर में अपेक्षित सहयोग नहीं दिया।
नवनाथ बन ने कहा पुणे में अंतिम समय पर सचिन सनाप को समर्थन देकर शिवसेना ने महायुति की एकता को कमजोर किया। उन्हें मिले वोट असल में वे वोट थे जो स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में भाजपा को मिल सकते थे। वहीं, छत्रपति संभाजीनगर में अब्दुल सत्तार ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के खिलाफ सीधे तौर पर प्रचार किया, जो नुकसानदेह साबित हुआ।
नवनाथ बन ने आगे लिखा अगर शिवसेना गठबंधन के सिद्धांतों का पालन करती और भाजपा तथा NCP के साथ मिलकर काम करती, तो महायुति सभी पांच सीटों पर जीत हासिल कर सकती थी। इसके बजाय, पुणे में एक सीट हासिल करने की चाहत में शिवसेना ने अपने सहयोगियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं और तीन सीटें जीतने का मौका गंवा दिया। अपने सहयोगियों का नुकसान करके किसी एक सीट को प्राथमिकता देना, महायुति के हित में नहीं है।