इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना (सोर्स: एआई)
महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर सख्ती, 3 साल के औसत खर्च से ज्यादा लागत पर कैबिनेट मंजूरी जरूरी

Maharashtra Infrastructure Project Approval: सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की मंजूरी के नियम बदले हैं। तीन साल के औसत खर्च के तिगुने से अधिक लागत वाले कामों को कैबिनेट की मंजूरी लेनी होगी।

आलोक उमाकृष्ण

Highlights

  • नए मानदंड सड़क, पुल, रेलवे, बांध, जलापूर्ति और सरकारी भवनों पर लागू होंगे।

  • नियोजन विभाग ने सरकारी आदेश जारी कर बदलाव की जानकारी दी है।

  • प्रस्ताव में पिछले तीन वर्षों का औसत खर्च बताना अनिवार्य होगा।

Infrastructure Project Approval New Rules: महाराष्ट्र में बुनियादी ढांचे के विकास में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन लाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। इस नए फैसले के तहत यदि विकास कार्यों का खर्च पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत खर्च के तिगुने से अधिक होता है, तो अब सीधे मंत्रिमंडल या कैबिनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

सभी बड़ी परियोजनाओं पर लागू होंगे नए नियम

नियोजन विभाग की ओर से जारी सरकारी आदेश के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार के नए मानदंड राज्य की सभी प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर लागू होंगे। इनमें सड़क निर्माण, पुल, रेलवे, बांध, जलापूर्ति योजनाएं और सरकारी भवनों से जुड़े कार्य शामिल हैं। यानी अब इन क्षेत्रों में प्रस्तावित बड़े विकास कार्यों की प्रशासनिक मंजूरी तय वित्तीय नियमों के आधार पर दी जाएगी।

परियोजना की अनुमानित लागत यदि पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत खर्च के तिगुने से अधिक होती है, तो उसे आगे बढ़ाने से पहले मंत्रिमंडल या कैबिनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी की मंजूरी लेना जरूरी होगा। इससे बड़े प्रोजेक्ट्स के खर्च पर निगरानी बढ़ेगी।

प्रस्तावों के साथ देना होगा खर्च और देरी का पूरा ब्यौरा

महाराष्ट्र सरकार के नए नियमों के तहत किसी भी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना का प्रस्ताव पेश करते समय संबंधित विभाग को विस्तृत वित्तीय जानकारी देनी होगी। इसमें पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत खर्च का स्पष्ट ब्योरा देना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही परियोजना पर पहले से मौजूद देनदारियों और भविष्य में होने वाले संभावित खर्चों की जानकारी भी देनी होगी।

यदि किसी काम में देरी हुई है, तो उसके कारणों का विश्लेषण भी प्रस्ताव के साथ प्रस्तुत करना होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य परियोजनाओं की लागत, वित्तीय स्थिति और कार्यान्वयन की चुनौतियों का आकलन करना है, ताकि मंजूरी से पहले सभी जरूरी पहलुओं की जांच हो सके।

वित्तीय नियंत्रण और जवाबदेही

सभी संशोधित प्रस्तावों को वित्त विभाग के निर्देशों के अनुरूप प्रस्तुत करना होगा। साथ ही, इन सभी परियोजनाओं का विकसित महाराष्ट्र-2047 के विजन के अनुकूल होना आवश्यक है। इस कदम से बड़े बजट की योजनाओं के क्रियान्वयन में वित्तीय नियंत्रण और प्रशासनिक जवाबदेही तय होगी।

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