Abhijit Dipke Demand Education Minister Dada Bhuse Resignation: महाराष्ट्र के सरकारी विद्यालयों की जर्जर स्थिति और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर राजनीति गर्मा गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के संयोजक अभिजीत दिपके ने प्रदेश के स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की पुरजोर मांग की है। 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत लातूर जिले की औसा तहसील स्थित उजनी गांव के जिला परिषद स्कूल का दौरा करने के बाद दिपके ने सरकारी तंत्र की पोल खोलकर रख दी।
महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के संयोजक अभिजीत दिपके ने गुरुवार को महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग की।
स्कूल ठीक करो अभियान के तहत लातूर की औसा तहसील के उजनी गांव स्थित जिला परिषद स्कूल का दौरा करने के बाद अभिजीत दिपके ने कहा कि कई सरकारी स्कूलों में कक्षाओं, बेंच, शौचालय और सुरक्षित पहुंच मार्ग जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। स्कूलों की स्थिति के लिए मंत्रियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
अभिजीत दिपके ने कहा कि कुछ स्कूलों में छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं इतनी खराब हैं कि मंत्रियों के कुत्तों को भी इससे बेहतर सुविधाएं मिलती हैं। यदि सरकार सरकारी विद्यालयों की स्थिति सुधारने को लेकर गंभीर है तो मंत्रियों और विधायकों को अपने बच्चों को इन्हीं स्कूलों में पढ़ाना चाहिए, ताकि उन्हें छात्रों की समस्याओं का वास्तविक अनुभव हो।
कई स्कूलों में टीन की छतों से पानी टपकता है और पर्याप्त बेंच नहीं हैं। वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होना सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है।
अभिजीत दिपके ने लोगों से अपील की कि वे चुनाव के दौरान वोट मांगने आने वाले नेताओं से पहले शिक्षा के क्षेत्र में काम करने की मांग करें। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी स्कूलों की समस्याओं को लेकर स्थानीय लोगों के साथ अभियान जारी रखेगी और जरूरत पड़ने पर बड़े विरोध प्रदर्शन भी किए जाएंगे। उन्होंने लातूर में नीट प्रश्नपत्र लीक मामले की सीबीआई की जांच पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जांच का दायरा निचले स्तर के आरोपियों तक सीमित दिखाई दे रहा है।
CJP नेता अभिजीत दिपके के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत लातूर जिले के औसा स्थित केंद्रीय प्राथमिक जिला परिषद स्कूल में कथित तौर पर निजी स्कूल के बच्चों को सरकारी स्कूल की कक्षा में बैठाने का मामला सामने आया है। दिपके के नेतृत्व में किए गए सोशल ऑडिट के दौरान बच्चों से पूछताछ का वीडियो सामने आया है, जिसमें कुछ बच्चे कथित तौर पर खुद को निजी स्कूल का विद्यार्थी बताते नजर आ रहे हैं।
वीडियो में एक बच्चे के यह कहने के बाद कि उसे यहां लाकर बैठाया गया है, स्कूल के प्रधानाध्यापक ने दावा किया कि ये बच्चे पास के उर्दू स्कूल के विद्यार्थी हैं। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है और इसके आधार पर जिला परिषद स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।