रातों-रात सफाई, खाने के लिए नई प्लेटें और फर्जी बच्चे! लेकिन अभिजीत के एक सवाल ने खोली सरकारी स्कूल की पोल

School Thik Karo Abhiyan Latur: लातूर में स्कूल ठीक करो अभियान के तहत चेकिंग करने पहुंचे अभिजीत दीपके के सामने स्कूल प्रशासन ने बिठाए फर्जी बच्चे। एक सवाल ने खोल दी सरकारी स्कूल के फर्जीवाड़े की पोल।
Latur government school fake students Abhijeet Dipke viral video
लातूर की स्कूल में अभिजीत दीपके(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Latur Government School Dummy Students Exposed: क्या आपने कभी सुना है कि किसी सरकारी स्कूल की बदहाली और प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने के लिए अधिकारी इस हद तक गिर जाएं कि वे असली छात्रों की जगह दूसरे स्कूलों से डमी बच्चे लाकर बिठा दें? जी हां, यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि महाराष्ट्र के लातूर जिले से सामने आई एक बेहद चौंकाने वाली और शर्मनाक हकीकत है।

सोशल ऑडिट करने पहुंचे युवाओं के सामने स्कूल प्रशासन की धोखाधड़ी का एक ऐसा अजीबोगरीब खेल उजागर हुआ, जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। इस पूरे सनसनीखेज खुलासे का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है।

कैसे रचा गया धोखेबाज़ी का यह नाटक?

यह पूरा सनसनीखेज मामला महाराष्ट्र के लातूर जिले के औसा तहसील का है। यहां स्कूल ठीक करो अभियान के तहत सोशल ऑडिट करने के लिए अभिजीत दीपके अपनी टीम के साथ एक जिला परिषद स्कूल पहुंचे थे। टीम के आने की भनक लगते ही स्कूल प्रशासन ने कमियों को छिपाने के लिए रातों-रात और आनन-फानन में कई बदलाव कर दिए।

जांच के दौरान वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने बताया कि कल शाम ही वहां अचानक एक जेसीबी मशीन बुलाई गई थी। इसके अलावा, पहले जिस स्कूल में लाइट तक नहीं थी, वहां अचानक गैस सिलेंडर की व्यवस्था की गई और चमचमाती हुई नई खाने की प्लेटें उसी दिन मंगवाई गईं। यह सारा तमाशा केवल इसलिए किया गया ताकि मीडिया और सोशल ऑडिट टीम के सामने स्कूल की एक काल्पनिक और सुंदर तस्वीर पेश की जा सके।

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बैग कहां हैं? - इस एक सवाल ने बिगाड़ दिया पूरा खेल

प्रशासन ने तैयारी तो बड़ी शातिर की थी, लेकिन एक बुनियादी चीज भूल गया। ऑडिट करने पहुंचे अभिजीत दीपके को क्लास में बैठे बच्चों को देखकर कुछ अजीब लगा। उन्होंने वहां बैठे बच्चों से सीधा सवाल किया, बाकी लोगों की बैग कहां पर है?

कमरे में बैठे किसी भी बच्चे के पास स्कूल बैग नहीं था, इस एक सवाल ने अधिकारियों के माथे पर पसीना ला दिया। संदेह होने पर अभिजीत दीपके ने बच्चों से बेहद आत्मीयता से बातचीत शुरू की। उन्होंने बच्चों का डर दूर करने के लिए प्यार से कहा, आप स्कूल के नहीं हो तो आपको यहां पर लाया कौन? बोलो... नाम बोलो, डरो मत... चॉकलेट चाहिए ना सबको?

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मासूम बच्चों ने कैमरे पर खोल दी पूरी पोल

चॉकलेट के नाम और बिना किसी डर के, बच्चों की मासूमियत ने स्कूल प्रशासन के झूठ का पुलिंदा ढहा दिया। बच्चों ने कैमरे के सामने साफ तौर पर स्वीकार किया कि यह उनका स्कूल नहीं है। जब उनसे उनके असली स्कूल के बारे में पूछा गया, तो एक बच्चे ने बताया कि उनका असली स्कूल पास की मस्जिद के पास है, जबकि कुछ अन्य बच्चों ने अपने स्कूल का नाम पीपल... बताया।

वास्तव में, इन बाहरी और निजी स्कूल के बच्चों को केवल इसलिए लाया गया था ताकि मीडिया के कैमरों के सामने उन्हें इस स्कूल के छात्र के रूप में बैठाकर भोजन कराया जा सके और दिखाया जा सके कि स्कूल सुचारू रूप से चल रहा है।

इस शर्मनाक घटना के उजागर होने के बाद अभिजीत दीपके ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रशासन स्कूलों की वास्तविक स्थिति को सुधारने के बजाय अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए मासूम बच्चों को मोहरा बनाकर इस तरह की धोखाधड़ी का सहारा क्यों ले रहा है?

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