प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया ) 
जालना

जालना में महापौर पद के लिए भाजपा की चार महिला नगरसेविकाओं की दौड़, किसे मिलेगी मेयर कुर्सी?

Jalna Mayor Race: जालना में महापौर पद अनुसूचित जाति (महिला) के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा की चार महिला नगरसेविकाएं रेस में हैं। चयन में कैलाश गोरंट्याल की भूमिका अहम मानी जा रही है।

अंकिता पटेल

SC Woman Reservation: जालना मनपा चुनाव होने के बाद महापौर पद को लेकर राजनीतिक तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती नजर आ रही है। महापौर पद अनुसूचित जाति (महिला) के लिए आरक्षित होने से कई वरिष्ठ नेताओं की उम्मीदों को झटका लगा है, वहीं भाजपा की ओर से चार महिला नगरसेविका इस पद की दौड़ में सामने आई हैं।

यह बात साफ है कि भाजपा को बहुमत होने से भाजपा की महापौर बनेगी। महापौर के चयन में पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल की भूमिका अहम मानी जा रही है, वे किसे शहर की प्रथम नागरिक बनाते हैं यह देखना दिलचस्प रहेगा। भाजपा की ओर से अनुसूचित जाति वर्ग की चार महिला नगरसेविका महापौर पद की दौड़ में शामिल हैं।

पार्टी नेतृत्व इन्हीं में से किसी एक के नाम पर अंतिम फैसला कर सकता है। सूत्रों ने बताया कि वार्ड क्रमांक 14 से निर्वाचित एड। रीमा संदीप खरात शिक्षित चेहरा है। कानूनी अनुभव के कारण उनका नाम सबसे आगे माना जा रहा है। इसके अलावा वार्ड क्रमांक 2 से निर्वाचित श्रद्धा दीपक सालवे युवा नेतृत्व है और अपने वार्ड में मजबूत पकड़ उनकी ताकत मानी जा रही है।

यही नहीं, वार्ड क्रमांक 4 से निर्वाचित रूपा संजय कुरिल अनुभवी कार्यकर्ता के रूप में संगठन में अच्छी पहचान रखती हैं। वार्ड क्रमांक 15 से चुनी गई वंदना अरुण मगरे जमीनी स्तर से जुड़ी सक्रिय और लोकप्रिय कार्यकर्ता मानी जाती हैं।

फैसले पर टिकीं निगाहें

भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने से यह लगभग तय है कि शहर का महापौर भाजपा से ही होगा। हालांकि, पहली महिला महापौर' बनने का गौरव किसे मिलेगा, यह अभी तय नहीं है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व के निर्णय और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के आधार पर तस्वीर पूरी तरह साफ होने की संभावना है।

आरक्षण ने खड़े किए नए राजनीतिक समीकरण

महानगरपालिका के इतिहास में पहली बार हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। कुल 65 सीटों में से 41 सीटों पर जीत दर्ज कर पार्टी ने मनपा पर अपना दबदबा कायम किया है। चुनाव नतीजों के बाद सत्ता को लेकर स्थिति भले ही स्पष्ट हो गई हो, पर महापौर पद के आरक्षण ने नए राजनीतिक समीकरण खड़े कर दिए हैं।

महापौर पद को अनुसूचित जाति (महिला) के लिए आरक्षित घोषित किए जाने के बाद पुरुष दावेदारों और खुले वर्ग के नेताओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। इस बीच, आरक्षण घोषित होने के बाद इच्छुक महिलाओं ने पतियों व अपने नेताओं के जरिए यह शीर्ष पद हथियाने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए नेताओं के पास अब तक पार्टी के लिए किए गए विकास कार्यों, लौकप्रियता आदि को प्रमुखता से रखा जा रहा है। नगरपालिका के बाद मनपा के पहली बार चुनाव हुए है। ऐसे में यह शीर्ष पद हथियाने के लिए सभी पैतरे अपनाए जा रहे हैं।

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