Hingoli Smart Meter Electricity Bill Shock: महाराष्ट्र सरकार और महावितरण (MSEDCL) द्वारा बिजली बिलों में पारदर्शिता लाने के दावे के साथ लगाए जा रहे 'स्मार्ट मीटर' आम नागरिकों के लिए बड़ी मुसीबत बनते जा रहे हैं। हिंगोली शहर में एक अत्यंत चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां तीन छोटे कमरों में रहने वाली एक दिहाड़ी मजदूर महिला को महावितरण ने 2 महीने का 2,18,000 रुपये का बिजली बिल थमा दिया है।
बिल का भुगतान न कर पाने के कारण पिछले दो महीनों से महिला का पूरा परिवार अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर है।
हिंगोली शहर के सिद्धार्थनगर इलाके की रहने वाली प्रभावती श्रावणे मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं। उनके साधारण से तीन कमरों के मकान में महज 3 लाइट, 2 पंखे और एक टीवी चलता है।
इतनी कम बिजली खपत के बावजूद महावितरण द्वारा 2 लाख से अधिक का बिल थमाए जाने से उनके होश उड़ गए। प्रभावती का कहना है कि शिकायत करने पर महावितरण ने थोड़ी छूट देकर बिल की राशि 1,32,000 कर दी है, लेकिन प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी करने वाले परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम चुकाना पूरी तरह असंभव है।
बिजली बिल जमा न होने के कारण महावितरण के कर्मचारियों ने दो महीने पहले ही प्रभावती के घर की बिजली काट दी थी। भीषण गर्मी और उमस के बीच परिवार के लोग दो महीनों से दिन और रात अंधेरे में बिता रहे हैं। महावितरण के दावे कि स्मार्ट मीटरों से ग्राहकों को सहूलियत मिलेगी और अत्यधिक बिल की समस्या खत्म होगी, इस घटना के बाद पूरी तरह खोखले साबित होते दिख रहे हैं।
इस घटना के सामने आने के बाद हिंगोली में नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा। बिजली उपभोक्ता संघ के बैनर तले महावितरण कार्यालय के सामने विशाल प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में हिंगोली शहर के व्यापारियों के साथ-साथ सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के स्थानीय नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने प्रतीकात्मक स्मार्ट मीटर पर पुष्पांजलि अर्पित कर विरोध दर्ज कराया और मांग की कि जबरन स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता तुरंत खत्म कर पुराने मीटरों को ही बहाल किया जाए।