Gondia 7 Tehsils Not Declared Drough Farmers Demand: गोंदिया जिले की 7 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किए जाने से किसानों में नाराजगी है। फिलहाल सिर्फ तिरोड़ा तहसील को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।
किसानों ने सभी तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की है। इस वर्ष 1.94 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई है और कीट-रोग व बारिश के असमान क्रम से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
राज्य सरकार द्वारा गोंदिया जिले की गोंदिया, आमगांव, अर्जुनी मोरगांव, सड़क अर्जुनी, सालेकसा, देवरी और गोरेगांव तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किए जाने से किसानों में नाराजगी है। किसानों ने सरकार पर भेदभावपूर्ण नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए जिले की सभी तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने और तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
वर्तमान में जिले की सिर्फ तिरोड़ा तहसील को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। किसानों का कहना है कि अन्य तहसीलों में भी बारिश का असमान क्रम और फसलों पर कीट-रोगों का बढ़ता प्रकोप चिंता का विषय है। इसे देखते हुए अन्य तहसीलों को भी राहत के दायरे में लाने की मांग की जा रही है।
उपजिलाधिकारी भायासाहेब बेहेरे के अनुसार, तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का निर्णय शासन द्वारा निर्धारित 77 मानदंडों के आधार पर लिया गया है। जिले में तिरोड़ा में सबसे कम बारिश दर्ज हुई है। यहां अब तक 78.9 प्रतिशत बारिश हुई है, जबकि अन्य तहसीलों में बारिश की स्थिति तुलनात्मक रूप से संतोषजनक है।
धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध गोंदिया जिले में इस वर्ष 1 लाख 94 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की गई है। इसके अलावा 5 हजार हेक्टेयर में तुअर, 3 हजार हेक्टेयर में मक्का और 3 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की फसल लगाई गई है।
इस वर्ष मानसून करीब एक माह देरी से पहुंचा। जुलाई में कुछ राहत मिलने के बाद अगस्त में भी बारिश का असमान क्रम जारी रहा। अब मानसून अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन जिले में बारिश की कमी बनी हुई है।
24 सितंबर तक जिले में 1,167.3 मिमी बारिश अपेक्षित थी, जबकि 1,136.02 मिमी बारिश दर्ज की गई। यानी औसत की तुलना में करीब 57.06 मिमी बारिश कम हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में भी जिले में करीब 4 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
खरीफ सीजन में इस बार धान की फसल पर इल्ली, माहू और करपा जैसे रोगों का अधिक प्रकोप देखने को मिला। किसानों ने तीन से चार बार कीटनाशकों का छिड़काव किया, लेकिन अगस्त में मौसम में बदलाव और लगातार बादल छाए रहने से कीटनाशकों का अपेक्षित असर नहीं हुआ।
सितंबर में लगातार बारिश के कारण भी फसल प्रभावित हुई। इससे किसानों की लागत बढ़ी है और खर्च की तुलना में उत्पादन कम रहने की आशंका जताई जा रही है।
जिले में धान की फसल बढ़वार के अंतिम चरण में है। कई क्षेत्रों में धान में दाने भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस समय खेतों में पर्याप्त नमी जरूरी है। यदि बारिश में दोबारा लंबा अंतराल आता है तो हल्की मिट्टी वाले खेतों में पानी का तनाव बढ़ सकता है। इसका असर फसल की बढ़वार, दाने भरने और उत्पादन पर पड़ने की आशंका है।
जिला कृषि अधीक्षक नीलेश कानबड़े के अनुसार, जिले में बारिश की कमी है, लेकिन पानी की कमी का बहुत अधिक असर अभी नहीं पड़ा है। हालांकि भारी मिट्टी वाले खेतों में फसल प्रभावित होने की संभावना है। वर्तमान में कीट और रोगों का प्रकोप बड़े पैमाने पर है, जिससे उत्पादन में कमी आने की आशंका है। उन्होंने किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले कीटनाशकों का उपयोग करने की सलाह दी है।