खरीफ सीजन पर संकट के बादल, गोंदिया में डीजल की कमी से जुताई-बुआई कार्य प्रभावित

Fuel Shortage: गोंदिया में खाड़ी युद्ध के चलते डीजल की किल्लत से खरीफ की जुताई ठप है। जिलाधीश के अनुसार 200 लीटर की लिमिट में डीजल दिया जा रहा है, पर किसानों को कतारों में लगना पड़ रहा है।
Gondia Diesel Supply Issue
पेट्रोल पंप प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
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Gondia Diesel Supply Issue: खाड़ी युद्ध के मद्देनजर ईंधन की कमी का असर गोंदिया जिले के ग्रामीण इलाकों में दिखना शुरू हो गया है। खरीफ सीजन के ठीक पहले डीजल की कमी के कारण किसान बड़ी मुसीबत में हैं। जुताई और बुआई का काम रुक जाने से समय पर बुआई पर प्रश्नचिह्न लग गया है। मई के अंत तक, किसान खरीफ सीजन के लिए भूमि की खेती जल्दी से पूरा करने के लिए कमर कस रहे हैं। लेकिन, ग्रामीण क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर डीजल की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से ट्रैक्टर, रोटावेटर समेत अन्य कृषि यंत्रों का काम बंद हो गया है।

खाली हाथ लौट रहे

  • कई जगहों पर डीजल नहीं मिलने से किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
  • अतः यदि खेती का कार्य समय पर पूरा नहीं किया गया तो बड़े क्षेत्र में बुआई देर से होने या भूमि खाली रह जाने का डर रहता है।

जिले में पेट्रोल व डीजल का पर्याप्त मात्रा में भंडार उपलब्ध

गोंदिया जिलाधीश डॉ. मंगेश गोदावले ने कहा है कि "जिले में पेट्रोल व डीजल का आवश्यक भण्डार उपलब्ध है। सरकारी आदेश के अनुसार किसानों को सीजन के लिए 200 लीटर डीजल देने का आदेश है। उसी हिसाब से डीजल दिया जा रहा है। हालांकि, जहां किसानों को चाचा पहुंचाई जा रही है, यहां शिकायत मिलते ही कार्रवाई की जाएगी।"

डीजल की अनुपलब्धता से जुताई का काम हो रहा बाधित

किस्सन पांजरा रविशंकर चामद  ने कहा है कि "मानसून की पूर्व सध्या और खरीफ सीजन की शुरुआत में डीजल की अनुपलब्धता के कारण जुताई का काम रुक गया है। आशंका है कि इससे पूरे सीजन का गणित बिगड़ जाएगा।"

प्रशासन उचित मूल्य व समय पर खाद-बीज उपलब्ध करें

झांजिया किसान भास्कर राऊत ने कहा है कि "सरकार को खरीफ सीजन के दौरान डीजल के सुचारू भंडारण और बिक्री की सुविधा प्रदान करनी चाहिए, साथ ही खाद की कालाबाजारी रोकी जाए और किसानों को उचित मूल्य व समय पर खाद व बीज उपलब्ध कराया।"

स्टॉक उपलब्ध नहीं होने से घंटों खड़े रहने को मजबूर

झाजिया ननीलाल बिसेन ने कहा है कि "पंटों पर डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों को अपने ट्रैक्टरी के साथ घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है। प्री-खरीफ जुगई, बुआई आदि गतिविधियों में व्यवधान के कारण कृषक समुदाय आर्थिक सकट में है।"

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