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कागजों पर डिजिटल, जमीन पर 'कतार': KYC और पेंशन के लिए आज भी घंटों इंतजार करने को मजबूर बुजुर्ग और दिव्यांग

Digital India Banking Issues: डिजिटल युग में भी बैंकों के बाहर लंबी कतारें! केवाईसी से लेकर पेंशन तक के लिए ग्राहक परेशान। आखिर किसे मिल रहा है डिजिटल इंडिया का वास्तविक लाभ?

प्रिया जैस

Digital Literacy for Seniors: देश डिजिटल, ऑनलाइन तथा अत्याधुनिक तकनीक के युग में प्रवेश कर चुका है, इसके बावजूद बैंकों में आज भी ग्राहकों को घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर लेन-देन करना पड़ रहा है। ‘डिजिटल इंडिया’ का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आम नागरिकों को आज भी पारंपरिक तरीकों से ही बैंकिंग कार्य निपटाने पड़ रहे हैं।

आधार लिंकिंग, केवाईसी अपडेट, पेंशन निकासी, सरकारी योजनाओं की राशि प्राप्त करना, खाता खोलना या साधारण रूप से पैसे जमा करना और निकालना हर छोटे-बड़े काम के लिए ग्राहकों को बैंक काउंटर के सामने कतार में लगना अनिवार्य हो गया है। विशेष रूप से वृद्ध नागरिकों, महिलाओं, दिव्यांगों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इन कतारों के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

डिजिटल लेन-देन के लिए एटीएम, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग तथा यूपीआई जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन आम ग्राहकों को इनका उपयोग करने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण तथा मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। कई बुजुर्गों के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करना कठिन है, वहीं ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या और तकनीकी बाधाएं आज भी गंभीर बनी हुई हैं।

एटीएम में अक्सर नकदी न होना, मशीन का बंद रहना या तकनीकी खराबी होना आम बात हो गई है। परिणामस्वरूप ग्राहकों को मजबूरन बैंक शाखा में जाकर फिर से लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है।

केवल ‘डिजिटल’ का ठप्पा पर्याप्त नहीं

केवल ऐप तथा योजनाओं की घोषणा कर ‘डिजिटल’ का ठप्पा लगाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए मजबूत बुनियादी ढांचा, पर्याप्त कर्मचारी, डिजिटल साक्षरता अभियान तथा ग्राहकों को प्रत्यक्ष सहायता देना अत्यंत आवश्यक है। आज भी बैंकों के बाहर लगी लंबी कतारें डिजिटल युग का एक बड़ा विरोधाभास बनकर सामने आ रही हैं।

यदि तकनीक के नाम पर आम नागरिकों को परेशानी उठानी पड़े, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि उस तकनीक का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिल रहा है? डिजिटल युग का वास्तविक फायदा आम लोगों तक पहुंचाने के लिए बैंकिंग व्यवस्था में तत्काल सुधार और ग्राहक-केंद्रित सेवाओं को प्राथमिकता देना समय की मांग बन गई है।

पिछले दरवाजे से चलता लेन-देन…

सरकारी बैंकों में जहां आम ग्राहकों को पैसे जमा करने या निकालने के लिए घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर अमीरों और व्यापारियों के बड़े लेन-देन कथित तौर पर कैश काउंटर के पीछे के दरवाजे से किए जाने की तस्वीर सामने आती है।

बैंकों में ग्राहक देखकर लेन-देन होने से सामान्य नागरिकों को अनावश्यक परेशानी सहन करनी पड़ती है। कई बैंकों में बैठने, पानी तथा छांव जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है, जिससे ग्राहकों को लंबे समय तक खड़े रहकर इंतजार करना पड़ता है।

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