UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? बजट 2026 से पहले आई चौंकाने वाली रिपोर्ट, जानें क्या मुफ्त सेवा होगी खत्म

UPI Transaction Charge: UPI ट्रांजैक्शन पर 2 रुपये का खर्च बैंक उठा रहे हैं। बजट 2026 में बड़े व्यापारियों पर 0.30% तक MDR शुल्क लग सकता है, हालांकि आम जनता के लिए लेन-देन मुफ्त रहने की उम्मीद है।
Will UPI Transactions Stay Free? Shocking Reality Ahead of Budget 2026 as Costs Surge for Banks
UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? (सोर्स-सोशल मीडिया)
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UPI zero MDR policy impact Budget 2026: भारत में डिजिटल क्रांति का चेहरा बन चुका UPI आज एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा है, जिसे लेकर बजट 2026 में बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। वर्तमान में हर UPI ट्रांजैक्शन पर आने वाला करीब 2 रुपये का तकनीकी खर्च बैंक और फिनटेक कंपनियां खुद वहन कर रही हैं। सरकार की जीरो MDR पॉलिसी ने इसे लोकप्रिय तो बनाया, लेकिन अब सब्सिडी में भारी कटौती ने इस फ्री मॉडल के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। भुगतान उद्योग और RBI अब एक ऐसे संतुलित मॉडल की मांग कर रहे हैं जो सिस्टम को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना सके।

डिजिटल लेन-देन का नया रिकॉर्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन के कारण भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान बाजार बन चुका है जहां 85% लेन-देन UPI से होता है। पिछले अक्टूबर में ही 20 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन हुए और करीब 27 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम लेन-देन दर्ज किया गया जो एक वैश्विक रिकॉर्ड है। हालांकि चिंता की बात यह है कि देश के करीब एक-तिहाई पिनकोड क्षेत्रों में आज भी 100 से कम एक्टिव मर्चेंट हैं, जो इसकी अधूरी पहुंच को दर्शाता है।

फ्री UPI की छिपी हुई लागत

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने छोटे व्यापारियों को बढ़ावा देने के लिए व्यापारियों से ली जाने वाली फीस यानी MDR को शून्य कर दिया था। हकीकत में हर ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने में बैंकों का पैसा खर्च होता है जिसे वहन करने के लिए सरकारी मदद अब लगातार कम होती जा रही है। साल 2023-24 में डिजिटल पेमेंट के लिए मिली 3900 करोड़ रुपये की सहायता राशि वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर महज 427 करोड़ रुपये रह गई है।

RBI और फिनटेक की चिंता

RBI गवर्नर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि UPI इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने का खर्च अगले दो वर्षों में 8000 से 10,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। फिनटेक कंपनियों का तर्क है कि बिना कमाई के वे सिस्टम की सुरक्षा को मजबूत करने और ग्रामीण इलाकों तक विस्तार करने में असमर्थ साबित हो रही हैं। फोनपे और पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी संकेत दिए हैं कि बिना किसी वित्तीय मॉडल के लंबे समय तक मुफ्त सेवा देना मुमकिन नहीं है।

बजट 2026 में संभावित समाधान

बजट 2026 में सरकार सीमित MDR को फिर से लागू करने का विचार कर सकती है ताकि UPI इकोसिस्टम को सब्सिडी पर निर्भर न रहना पड़े। प्रस्ताव के मुताबिक आम लोगों के आपसी लेन-देन (P2P) और छोटे दुकानदारों के लिए UPI पूरी तरह मुफ्त रहेगा लेकिन बड़े व्यवसायों पर मामूली शुल्क लगाया जा सकता है। जिन व्यापारियों का सालाना टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से अधिक है उनसे हर ट्रांजैक्शन पर 0.25 से 0.30 फीसदी तक की फीस लेने की योजना है।

डिजिटल इंडिया का भविष्य

इस प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य ग्राहकों पर बोझ डाले बिना उन कंपनियों को सशक्त बनाना है जो इस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को चौबीसों घंटे चालू रखती हैं। अगर सरकार बजट में सब्सिडी नहीं बढ़ाती है तो बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मामूली शुल्क लगाना ही एकमात्र विकल्प बचता है जिससे सुरक्षा और नवाचार बना रहे। बजट 2026 यह तय करेगा कि भारत का पसंदीदा पेमेंट मोड पूरी तरह सरकारी मदद पर चलेगा या फिर एक आत्मनिर्भर कमर्शियल मॉडल में बदल जाएगा।

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