Gadchiroli Wildlife Smuggling: वन्यजीवों के अंग खरीदने वाले व्यापारी बनकर अधिकारियों ने तस्करों से संपर्क साधा और मौका मिलते ही छह संदिग्धों को रंगेहाथ पकड़ लिया। आलापल्ली वनपरिक्षेत्र तथा कोकाबंडा-मूलचेरा क्षेत्र से जुड़े इस मामले में संभावित अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क के सामने आने की आशंका जताई जा रही है।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की इंदौर क्षेत्रीय टीम को गड़चिरोली जिले में संरक्षित वन्यजीवों के अंगों की बिक्री होने की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी), मुंबई और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, छत्तीसगढ़ के अधिकारियों के साथ मिलकर गोपनीय अभियान चलाया गया।
तस्करों को संदेह न हो, इसके लिए अधिकारियों ने वन्यजीवों के अंग खरीदने वाले व्यापारियों का रूप धारण किया और संदिग्धों से संपर्क कर सौदा तय किया। तय स्थान और समय के अनुसार छह संदिग्ध तीन मोटरसाइकिलों से आलापल्ली-सिरोंचा मार्ग पर पहुंचे। इसी दौरान घात लगाए संयुक्त दल ने उन्हें घेरकर हिरासत में ले लिया।
कार्रवाई के दौरान बाघ के अंग होने का संदेह वाले कुछ अवशेष तथा 2 जीवित पैंगोलिन आरोपियों के पास से बरामद किए जाने की प्राथमिक जानकारी है। इनमें से एक पैंगोलिन का बच्चा बताया जा रहा है। हालांकि, जब्त अवशेष वास्तव में किस वन्यजीव के हैं, यह वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
मूलचेरा क्षेत्र के रहनेवाले बताए जा संदिग्धों के कोकाबंडा-मूलचेरा क्षेत्र के निवासी होने की प्राथमिक जानकारी सामने आई है। हालांकि, उनके नाम, उम्र, पूरे पते और उनके खिलाफ दर्ज मामले का आधिकारिक विवरण अभी सामने नहीं आया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वन्यजीवों के अवशेष संदिग्धों तक कैसे पहुंचे, कथित बाघ शिकार कहां हुआ, पैंगोलिन कहां से लाए गए तथा इस पूरे सौदे में और कौन-कौन शामिल हैं।
इस कार्रवाई में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से जुड़ी केंद्रीय एवं वन्यजीव एजेंसियों की भूमिका सामने आने से मामले की जांच का दायरा बढ़ गया है। पकड़े गए छह संदिग्ध केवल स्थानीय वाहक हैं अथवा किसी संगठित अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का हिस्सा हैं, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा। जांच एजेंसियो द्वारा संदिग्धों के मोबाइल फोन, आर्थिक लेन-देन, संपर्कों और मोटरसाइकिलों की जांच की जा रही है। इससे वन्यजीव तस्करी की पूरी श्रृंखला तक पहुंचने में मदद मिलने की संभावना है।
डीआरआई - राजस्व खुफिया निदेशालय, इंदौर क्षेत्रीय दल
डब्ल्यूसीसीबी वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, मुंबई
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व - छत्तीसगढ़