

Yavatmal Tiger Panic Grips Farmers Avoid Night: यवतमाल जिले में नेर तहसील के वटफली क्षेत्र में पिछले कई दिनों से बाघ की मौजूदगी से किसानों में दहशत का माहौल है। सोमवार, 24 अगस्त को वटफली शिवार के जंगल में बाघ द्वारा नीलगाय का शिकार किए जाने की घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचित किया।
बताया जा रहा है कि पिछले करीब एक महीने से बाघ वालकी, खंडाला और मारवाड़ी शिवार के आसपास घूम रहा है। जंगल परिसर में किसानों और ग्रामीणों को कई बार बाघ दिखाई देने की जानकारी सामने आई है। बाघ की लगातार मौजूदगी के कारण किसान अब रात के समय खेतों में रखवाली करने जाने से भी बच रहे हैं।
क्षेत्र में बाघ की दहशत के साथ किसानों के सामने जंगली जानवरों से फसलों को बचाने की चुनौती भी बढ़ गई है। नीलगाय और जंगली सूअरों के झुंड खेतों में घुसकर कपास और सोयाबीन की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि रात के समय खेतों में जाने में उन्हें बाघ के हमले का डर रहता है। ऐसे में फसलों की रखवाली करना मुश्किल हो गया है। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ने की आशंका है।
नेर तहसील के वटफली क्षेत्र में बाघ की गतिविधियों के कारण पिंपरी शिवार, दगड़ धानोरा, वटफली, खंडाला, वालकी और पाथरड सहित आसपास के इलाकों में भय का माहौल है। ग्रामीणों के अनुसार, बाघ केवल जंगल क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि खेतों के आसपास भी उसकी आवाजाही देखी जा रही है।
किसानों का दावा है कि इस क्षेत्र में बाघ ने जंगली जानवरों के अलावा पहले पालतू पशुओं का भी शिकार किया है। लगातार हो रही गतिविधियों से ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
किसानों का कहना है कि बाघ की मौजूदगी की जानकारी वन विभाग को कई बार दी जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। नीलगाय और जंगली सूअरों से फसलों को होने वाले नुकसान के साथ अब बाघ का खतरा भी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने और उसे सुरक्षित तरीके से जंगल क्षेत्र की ओर भेजने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि जब तक बाघ की आवाजाही पर नियंत्रण नहीं होता, तब तक रात में खेतों की रखवाली करना उनके लिए जोखिम भरा बना रहेगा।