गड़चिरोली में सूखे की समीक्षा सोर्स: AI
गड़चिरोली

गड़चिरोली में सूखे की स्थिति की समीक्षा, 30 सितंबर के बाद होगा अंतिम आकलन;24 प्रकल्पों में 76% जल भंडार उपलब्ध

Gadchiroli Rainfall Drought Situation: गड़चिरोली में संभावित सूखे की समीक्षा हुई। अब तक 81% बारिश और 24 जल प्रकल्पों में 76.12% उपयोगी जल भंडार है। 30 सितंबर के बाद अंतिम आकलन होगा।

मनीषा बोंदरे

Gadchiroli District Administration Water Storage: गड़चिरोली जिले में संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने वर्षा, फसल, जल भंडार और भूजल स्तर की समीक्षा की।

जिले में अब तक करीब 1,071 मिमी यानी 81% बारिश दर्ज हुई है। 24 जल प्रकल्पों में 76.12% उपयोगी जल भंडार उपलब्ध है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि 30 सितंबर तक के आंकड़ों के बाद ही सूखे को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।

गड़चिरोली में सूखे की समीक्षा

जिले में सूखे की संभावित स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने वर्षा, फसल की स्थिति, जल भंडार, भूजल स्तर और शासन द्वारा निर्धारित विभिन्न मानकों की विस्तृत समीक्षा की। जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्षा और फसल से संबंधित जानकारी सटीक, वस्तुनिष्ठ और अद्यतन रूप में दर्ज की जाए। क्षेत्रीय स्तर की जानकारी और आधिकारिक अभिलेखों में किसी भी तरह की विसंगति नहीं होनी चाहिए।

बैठक में जिप के सीईओ सुहास गाडे, एसडीओ एवं सहायक जिलाधिकारी अरुण एम., सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता राहुल मोरघडे सहित सभी उपजिलाधिकारी, तहसीलदार और संबंधित विभागों के अधिकारी प्रत्यक्ष तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित थे।

30 सितंबर के बाद होगा अंतिम आकलन

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जिले में सूखे की स्थिति को लेकर फिलहाल कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। जिले में औसत अपेक्षित वर्षा करीब 1,316 मिमी है। 23 सितंबर तक लगभग 1,071 मिमी यानी 81% बारिश दर्ज की गई है। हालांकि तहसीलवार वर्षा में अंतर है। गड़चिरोली, चामोर्शी, धानोरा और मुलचेरा तहसीलों में अब तक 75% से कम वर्षा दर्ज हुई है।

सितंबर के अंत तक और बारिश की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने 30 सितंबर तक के अंतिम आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही सूखे का मूल्यांकन करने के निर्देश दिए हैं।

24 प्रकल्पों में 76.12% उपयोगी जल भंडार

23 सितंबर 2026 तक जिले के 24 जल प्रकल्पों में 116.68 मिलियन घनमीटर उपयोगी जल भंडार उपलब्ध है, जो कुल उपयोगी क्षमता का 76.12% है। पिछले वर्ष इसी अवधि में 90.89 मिलियन घनमीटर यानी 59.30% उपयोगी जल भंडार था।

बड़े प्रकल्पों में दीना में 58.11 मिलियन घनमीटर यानी 86.03%, मध्यम परियोजनाओं में 38.57 मिलियन घनमीटर यानी 62.19%, सात लघु परियोजनाओं में 9.35 मिलियन घनमीटर यानी 75.11% और 15 पूर्व मालगुजारी तालाबों में 10.65 मिलियन घनमीटर यानी 94.40% उपयोगी जल भंडार उपलब्ध है।

पेयजल और सिंचाई का नियोजन

उपलब्ध जल भंडार के आधार पर पेयजल की आवश्यकता का नियोजन किया गया है। साथ ही खरीफ मौसम में करीब 15,100 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए संरक्षित सिंचाई की योजना बनाई गई है। वर्तमान जल भंडार को देखते हुए पेयजल अथवा खरीफ सिंचाई में तत्काल गंभीर कमी की स्थिति सामने नहीं आई है।

चारे की उपलब्धता पर भी नजर

बैठक में जिले में चारे की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। वन क्षेत्र अधिक होने के कारण फिलहाल चारे की कमी नहीं है। हालांकि आगामी अवधि में स्थिति पर नियमित निगरानी रखने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए हैं।

वर्षा के साथ फसल की स्थिति भी महत्वपूर्ण

सरकार की सूखा मूल्यांकन प्रक्रिया में जून से सितंबर तक की वर्षा, वर्षा में लंबे अंतराल, फसल की स्थिति और अन्य तकनीकी मानकों का संयुक्त आकलन किया जाता है। औसत वर्षा के 75% से कम रहने को एक महत्वपूर्ण प्राथमिक मानक माना जाता है। लगातार 3 से 4 सप्ताह तक बारिश नहीं होने की स्थिति को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाता है। प्रशासन के अनुसार जिले में फिलहाल ऐसा लगातार लंबा शुष्क अंतराल दर्ज नहीं हुआ है।

जिलाधिकारी पंडा ने अधिकारियों को क्षेत्रीय स्तर पर प्रत्यक्ष निरीक्षण कर फसलों की वास्तविक स्थिति की जानकारी अद्यतन रखने और वर्षा व फसल संबंधी आंकड़ों में किसी भी प्रकार की त्रुटि या विसंगति से बचने के निर्देश दिए।

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