Abhijeet Dipke Visit Education System: गड़चिरोली जिला में दुर्गम और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार की ओर से विभिन्न योजनाएं चलाए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन गड़चिरोली जिले के एटापल्ली तहसील में जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है।
'कॉक्रोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने गुरुवार को गड़चिरोली दौरे के दौरान एटापल्ली के कोसा आलेंगा, कोहका और डुम्मे स्थित जिला परिषद स्कूलों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्र की शैक्षणिक व्यवस्था की बदहाल स्थिति सामने आने का दावा किया गया।
गड़चिरोली जिला के कोसा आलेंगा गांव में स्कूल की इमारत मौजूद होने के बावजूद वह जीर्ण अवस्था में है और वहां एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। इसके चलते गांव की तीन छात्राओं को करीब दो किलोमीटर दूर स्थित कोहका स्कूल तक जंगल के रास्ते पैदल जाना पड़ता है।
स्थानीय क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी के साथ ही सांपों और अन्य वन्यजीवों का खतरा होने के बावजूद छात्राओं को रोजाना यह जोखिम भरा सफर करना पड़ रहा है। इस स्थिति को लेकर अभिजित दिपके ने विद्यार्थियों की सुरक्षा पर सवाल उठाया।
गड़चिरोली जिला में एटापल्ली तहसील के डुम्मे स्थित जिला परिषद प्राथमिक स्कूल में पहली से आठवीं कक्षा तक कुल 57 विद्यार्थी पढ़ते हैं। इन विद्यार्थियों के लिए केवल दो कक्षाएं, दो शिक्षक और एक प्रधानाध्यापक कार्यरत होने की जानकारी सामने आई।
स्कूल की कक्षाओं में पंखों की सुविधा नहीं होने के बावजूद कार्यालय में पंखा लगा होने की बात भी निरीक्षण के दौरान सामने आई। वर्ष 2023 में स्कूल भवन के जर्जर होने के कारण उसे निर्लेखित करने के लिए पत्र दिए जाने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं होने का दावा किया गया है।
गड़चिरोली जिला एटापल्ली तहसील के डुम्मे स्कूल में अभिजीत दिपके के दौरे से ठीक एक दिन पहले प्रशासन द्वारा विद्यार्थियों के लिए पेयजल हेतु नल की व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई।
इस पर दिपके ने सवाल उठाते हुए कहा कि, यदि एक दिन में पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है, तो इसके लिए दो वर्ष तक इंतजार क्यों करना पड़ा।
गड़चिरोली जिला परिषद स्कूलों की स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अभिजित दिपके ने प्रशासन से सवाल किया कि यदि, जंगल के रास्ते स्कूल जाते समय किसी विद्यार्थी पर वन्यजीव हमला करता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि, यदि किसी मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी के बच्चे को बाधों के खतरे के बीच दो किलोमीटर पैदल चलकर ऐसी सुविधाओं की कमी वाले स्कूल में जाना पड़ता, तो क्या प्रशासन इसी तरह की व्यवस्था बनाए रखता।
स्कूल की इमारत गांव में मौजूद होने के बावजूद शिक्षक नहीं होना, विद्यार्थियों को दूसरे गांव तक जोखिम भरे रास्ते से जाने के लिए मजबूर होना तथा निरीक्षण से ठीक पहले सुविधाओं की अस्थायी व्यवस्था किए जाने जैसे मुद्दों ने आदिवासी विद्यार्थियों की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए है।
गड़चिरोली जिला में कोहका स्थित स्कूल में 27 विद्यार्थियों के लिए केवल दो शिक्षक उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई।
जगह की कमी के कारण पहली से चौथी कक्षा तक के विद्यार्थियों को एक ही कमरे में पढ़ाया जा रहा है। दिपके के दौरे की जानकारी मिलने के बाद कोसा आलेंगा स्थित बंद स्कूल की ग्रामसेवक द्वारा आनन-फानन में साफ-सफाई किए जाने का भी दावा किया गया।