गड़चिरोली में खाट बनी एंबुलेंस; गर्भवती को 3 किमी तक पैदल ले गए परिजन, खुद आशा कार्यकर्ता है महिला

Gadchiroli Pregnant Woman : गड़चिरोली जिले के एटापल्ली के नैनगुड़ा में सड़क नहीं होने से 27 वर्षीय गर्भवती को करीब 3 किमी खाट पर ले जाना पड़ा। महिला खुद आशा कार्यकर्ता हैं।
Gadchiroli Road Connectivity
सड़क सुविधा नहीं (सोर्स : AI)
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Gadchiroli Road Connectivity : सड़क की सुविधा नहीं होने का खामियाजा एक गर्भवती महिला को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ा।

गड़चिरोली जिले के एटापल्ली तहसील के नैनगुड़ा में एंबुलेंस तक पहुंचने के लिए 27 वर्षीय गर्भवती को करीब 3 किलोमीटर तक खाट पर ले जाना पड़ा। हैरानी की बात यह है कि संबंधित महिला खुद आशा कार्यकर्ता हैं।

नैनगुड़ा में सड़क के अभाव का मामला

गड़चिरोली जिले के एटापल्ली तहसील के दुर्गम क्षेत्रों में सड़क और परिवहन की समस्या एक बार फिर सामने आई है। कोटमी ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले नैनगुड़ा गांव में सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए खाट का सहारा लेना पड़ा।

करीब तीन किलोमीटर तक महिला को खाट पर ले जाने के बाद एंबुलेंस तक पहुंचाने की स्थिति बनी। जानकारी के अनुसार, प्रीति अमोल पल्लो (27) नैनगुड़ा की निवासी हैं और गर्भवती हैं। तबीयत से जुड़ी जरूरत के चलते उन्हें अस्पताल ले जाना था।

लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस सीधे घर तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों को महिला को खाट पर लेकर करीब तीन किलोमीटर तक चलना पड़ा।

खुद आशा कार्यकर्ता हैं प्रीति

इस घटना का सबसे अहम पहलू यह है कि प्रीति अमोल पल्लो स्वयं आशा कार्यकर्ता हैं। आशा कार्यकर्ता ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में स्वास्थ्य व्यवस्था से सीधे जुड़ी एक महिला को ही इलाज के लिए एंबुलेंस तक पहुंचने में सड़क की समस्या के कारण खाट का सहारा लेना पड़ा।

यह घटना दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की चुनौती को सामने लाती है। गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर चिकित्सा सुविधा और आपात स्थिति में एंबुलेंस तक पहुंच बेहद महत्वपूर्ण होती है। लेकिन सड़क संपर्क नहीं होने पर कई बार मरीजों को पैदल या वैकल्पिक साधनों से मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है।

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सड़क सुविधा की जरूरत पर फिर सवाल

गड़चिरोली जिले में नैनगुड़ा की घटना के बाद दुर्गम गांवों में सड़क सुविधा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

खासकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए गांवों तक बेहतर सड़क संपर्क जरूरी माना जाता है। नैनगुड़ा में गर्भवती महिला को तीन किलोमीटर तक खाट पर ले जाने की घटना इसी चुनौती को उजागर करती है।

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