महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को वाराणसी में ‘सनातन मार्तंड’ सम्मान मिला।
उन्हें ‘धर्मध्वजाधारक’ की उपाधि से भी सम्मानित किया गया।
शिंदे ने सनातन धर्म और धर्मरक्षा के लिए जीवनभर समर्पित रहने की बात कही।
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ को भव्य, सुरक्षित और स्वच्छ बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
Maharashtra Deputy CM Eknath Shinde: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और संत परंपरा के संरक्षण को अपना सर्वोच्च संकल्प बताते हुए कहा कि सत्ता से बड़ा सिद्धांत, सत्य और अधिकार से श्रेष्ठ धर्म एवं कर्तव्य होता है।
सनातन धर्म और धर्मरक्षा के लिए शरीर में रक्त की अंतिम बूंद रहने तक समर्पित रहूंगा। वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘संस्कृति संसद 2026’ में शिंदे को अखिल भारतीय संत समिति और गंगा महासभा की ओर से काशी के शंकराचार्य की उपस्थिति में प्रतिष्ठित ‘सनातन मार्तंड’ पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
देश भर से जुटे संतो विद्वानों के बीच उन्होंने कहा कि उनके लिए सत्ता कभी सर्वोपरि नहीं रही, बल्कि विचारधारा और सिद्धांत हमेशा सर्वोच्च रहे हैं।
उन्हें ‘धर्मध्वजाधारक’ की उपाधि भी दी गई। देशभर से जुटे संत-महंतों, महामंडलेश्वरों, धर्माचार्यों और विद्वानों की उपस्थिति में हुए इस सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए शिंदे ने इसे महाराष्ट्र की जनता, किसानों, महिलाओं, युवाओं और वारकरी संप्रदाय का सम्मान बताया।
शिंद ने कहा कि काशी भारत की आत्मा है और महाराष्ट्र के साथ इसका रिश्ता सदियों पुराना है। संत ज्ञानेश्वर और संत नामदेव ने भक्ति एवं भागवत धर्म के माध्यम से सामाजिक और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।
छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक में काशी के गागाभट्ट की भूमिका और छत्रपति संभाजी महाराज के धर्मरक्षण के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र की संत परंपरा और शौर्यगाथा को नमन किया।
शिंदे ने हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्ववादी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पालघर में साधुओं की हत्या के बाद धर्मरक्षा के लिए सत्ता छोड़ने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री रहते हुए भी और आज उपमुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए भी वे स्वयं को एक कार्यकर्ता ही मानते हैं।
महाराष्ट्र सरकार के निर्णयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने, व्यक्ति के नाम के साथ मां का नाम जोड़ने और ‘लाडकी बहिण’ योजना के जरिए महिला सशक्तीकरण की पहल को रेखांकित किया।
गोसंवर्धन को किसानों की आय, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प भी जताया। पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सराहना करते हुए।
उन्होंने अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल कॉरिडोर, चारधाम और नमामि गंगे अभियान को सनातन संस्कृति के पुनरुत्थान का प्रतीक बताया। साथ ही नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ को भव्य, दिव्य, सुरक्षित और स्वच्छ बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
उन्होंने कहा कि मंदिरों के साथ अस्पताल, तीर्थस्थलों के साथ आधुनिक शिक्षा संस्थान और विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी जरूरी है।
नई पीढ़ी को योग, संस्कृत, भगवद्गीता और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और लोकतांत्रिक संस्थाओं के विरुद्ध अराजकता फैलाने वाली शक्तियों का वैचारिक स्तर पर मुकाबला करने के लिए एकजुटता जरूरी है।
समारोह में काशी सुमेरु पीठ के शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती,अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी, जगद्गुरु अविचल देवाचार्य, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर जनार्दन हरि,सुनील देवधर,काशी विद्वत परिषद के रामनारायण द्विवेदी, रामचंद्र पांडे,अक्षय महाराज भोसले, सत्येन्द्र मिश्र,गोविंद शर्मा सहित देशभर के अनेक संत-महंत और धर्माचार्य उपस्थित रहे। शिंदे ने ‘ना झुकेगा स्वाभिमान, ना बदलेगा विचार’ के उद्घोष के साथ ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्रीराम’ के जयघोष में अपना संबोधन समाप्त किया।