स्कोडा और जेएसडब्लू के लोगो (सोर्स: सोशल मीडिया)
छत्रपति संभाजीनगर

छत्रपति संभाजीनगर बनेगा बड़ा ऑटोमोबाइल हब! JSW-स्कोडा का ऐतिहासिक MoU साइन, जानें पूरा प्लान

Skoda Cars Manufacturing Sambhajinagar: छत्रपति संभाजीनगर स्थित JSW मोटर्स के प्लांट में बनेगी स्कोडा की कारें। स्कोडा और JSW ग्रीन मोबिलिटी ने रणनीतिक साझेदारी के लिए किया MoU, जानें पूरा प्लान।

शफीउल्ला हुसैनी, गोरक्ष पोफली

Skoda JSW MOU Chhatrapati Sambhajinagar: छत्रपति संभाजीनगर का नाम एक बार फिर देश के वाहन उद्योग के नक्शे पर तेजी से उभर सकता है। स्कोडा ऑटो एएस और जेएसडब्ल्यू ग्रीन मोबिलिटी लिमिटेड के बीच प्रस्तावित साझेदारी में जेएसडब्ल्यू की विनिर्माण क्षमता का इस्तेमाल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके तहत छत्रपती संभाजीनगर स्थित जेएसडब्ल्यू मोटर्स के संयंत्र में स्कोडा के कुछ वाहनों का स्थानीय उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

स्कोडा कोडियाक जैसे मॉडलों के स्थानीयकरण की संभावना भी चर्चा में है। हालांकि, कंपनी की ओर से अभी किसी विशेष मॉडल या उत्पादन योजना की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

स्कोडा-फॉक्सवैगन और जेएसडब्ल्यू का एमओयू

स्कोडा ऑटो एएस और जेएसडब्ल्यू ग्रीन मोबिलिटी ने भारत में रणनीतिक संयुक्त उपक्रम की संभावनाएं तलाशने के लिए गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रस्तावित साझेदारी के तहत भारत और विदेशी बाजारों के लिए यात्री वाहनों का विकास, निर्माण और बिक्री की जाएगी। अंतिम समझौते, निवेश और हिस्सेदारी का स्वरूप आगे की बातचीत के बाद तय होगा।

छत्रपती संभाजीनगर को क्यों मिल सकता है फायदा

जेएसडब्ल्यू के पास छत्रपति संभाजीनगर में वाहन निर्माण की क्षमता और बुनियादी ढांचा मौजूद है। ऐसे में प्रस्तावित संयुक्त उपक्रम के तहत मौजूदा उत्पादन सुविधाओं का बेहतर उपयोग करने की संभावना है। स्थानीय उत्पादन बढ़ने से क्षेत्र में वाहन उद्योग से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला को भी बढ़ावा मिल सकता है। कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों, परिवहन और अन्य संबद्ध कारोबारों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

इलेक्ट्रिक के साथ हाइब्रिड वाहनों पर भी जोर

प्रस्तावित साझेदारी केवल इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं होगी। पेट्रोल-डीजल वाहनों के साथ इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों के विकास और निर्माण पर भी काम किया जा सकता है। कंपनियों का लक्ष्य भारत में उत्पादों की संख्या बढ़ाने के साथ स्थानीयकरण को मजबूत करना है।

भारत से विदेशी बाजारों तक पहुंच

साझेदारी का उद्देश्य भारतीय बाजार के साथ-साथ विदेशी बाजारों के लिए भी वाहन तैयार करना है। भारत में निर्मित वाहनों के निर्यात की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। इससे देश में उत्पादन का पैमाना बढ़ाने और भारत को क्षेत्रीय वाहन निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मदद मिल सकती है।

अंतिम समझौते पर अभी फैसला बाकी

दोनों कंपनियों के बीच हुआ एमओयू गैर-बाध्यकारी है। इसलिए अभी यह तय नहीं हुआ है कि संयुक्त उपक्रम में किसकी कितनी हिस्सेदारी होगी और कितना निवेश किया जाएगा। अंतिम कारोबारी ढांचा तय होने के बाद ही उत्पादन, मॉडल और संयंत्रों से जुड़ी योजनाओं की तस्वीर स्पष्ट होगी। ऐसे में छत्रपति संभाजीनगर प्लांट में स्कोडा वाहनों के संभावित उत्पादन को फिलहाल एक संभावना के रूप में ही देखा जा रहा है।

अगर यह योजना अंतिम रूप लेती है, तो छत्रपति संभाजीनगर के वाहन उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलने के साथ शहर की औद्योगिक पहचान भी और मजबूत हो सकती है।

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