मलिक अंबर 400वीं पुण्यतिथि (सोर्सः सोशल मीडिया)
छत्रपति संभाजीनगर

मलिक अंबर की 400वीं पुण्यतिथि पर निकली महमूदपुरा हेरिटेज वॉक, ऐतिहासिक विरासत से परिचित हुए नागरिक

Malik Ambar 400Th Death Anniversary: मलिक अंबर की 400वीं पुण्यतिथि पर छत्रपति संभाजीनगर में महमूदपुरा हेरिटेज वॉक का आयोजन हुआ। पदयात्रा में नागरिकों ने चार सदी पुरानी विरासत को जाना।

शफीउल्ला हुसैनी, आंचल लोखंडे

Mahmudpura Heritage Walk: छत्रपति संभाजीनगर शहर की पहचान केवल उसके प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारकों तक सीमित नहीं है। इसकी गलियों और पुरानी बस्तियों में आज भी चार शताब्दियों पुरानी जलव्यवस्था, स्थापत्य कला और शाह नियोजन की अनमोल विरासत बिखरी हुई है। इसी विरासत से नागरिकों को परिचित कराने के उद्देश्य से मलिक अंबर की 400वीं पुण्यतिथि पर रविवार को ‘महमूदपुरा हेरिटेज वॉक’ का आयोजन किया गया था। छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका के पर्यटन विभाग और INTACH छत्रपति संभाजीनगर चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में इतिहासप्रेमी, विद्यार्थी और नागरिक शामिल हुए।

गोमुख से शुरू हुई विरासत यात्रा

हेरिटेज वॉक की शुरुआत नहर-ए-अंबरी की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल गोमुख से हुई। प्रतिभागियों को मलिक अंबर द्वारा तत्कालीन खड़की शहर के सुनियोजित विकास के लिए तैयार की गई जलापूर्ति व्यवस्था की जानकारी दी गई। करीब चार शताब्दी पहले विकसित की गई नहर-ए-अंबरी उस दौर की उन्नत जल प्रबंधन और अभियांत्रिकी क्षमता का उदाहरण मानी जाती है। प्रतिभागियों को बताया गया कि तत्कालीन शहर की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मलिक अंबर ने जलस्रोतों के बेहतर उपयोग और व्यवस्थित जलापूर्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया था।

अनदेखी ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने पर जोर

INTACH छत्रपति संभाजीनगर चैप्टर के सह-संयोजक एड. स्वप्निल जोशी ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए हेरिटेज वॉक की संकल्पना और उद्देश्य बताया। उन्होंने कहा कि शहर के चर्चित स्मारकों के अलावा अनेक ऐतिहासिक वास्तुएं पुरानी बस्तियों और मोहल्लों में बिखरी हुई हैं। इन धरोहरों का दस्तावेजीकरण, संरक्षण और इनके प्रति नागरिकों में जागरूकता पैदा करना जरूरी है। पारंपरिक जलव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत भी शहर के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिन्हें आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने की आवश्यकता है।

मलिक अंबर 400वीं पुण्यतिथि

इतिहास और स्थापत्य की दी गई जानकारी

इतिहास अध्येता संकेत कुलकर्णी और आदित्य वाघमारे ने हेरिटेज वॉक का मार्गदर्शन किया। उन्होंने प्रतिभागियों को नहर-ए-अंबरी की ऐतिहासिक जलव्यवस्था, महमूदपुरा क्षेत्र के विकास और यहां मौजूद विभिन्न ऐतिहासिक इमारतों की जानकारी दी। साथ ही मलिक अंबर के शाह रविकास में योगदान तथा उस दौर की स्थापत्य परंपराओं के बारे में भी विस्तार से बताया।

मकबरे से नीलकंठेश्वर मंदिर तक पहुंची यात्रा

पदयात्रा के दौरान नागरिकों ने महमूदपुरा स्थित ऐतिहासिक मकबरे और श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर का भ्रमण किया। इसके अलावा राजपूत छतरी स्थापत्य शैली में निर्मित बारादरी भी प्रतिभागियों के आकर्षण का केंद्र रही। विशेषज्ञों ने बारादरी की वास्तुकला, निर्माण शैली और उसके ऐतिहासिक महत्व से नागरिकों को अवगत कराया। इस दौरान प्रतिभागियों को शहर में विभिन्न कालखंडों की स्थापत्य परंपराओं के सह-अस्तित्व की जानकारी भी मिली।

महापौर समेत बड़ी संख्या में नागरिक हुए शामिल

हेरिटेज वॉक में महापौर समीर राजूरकर, स्थायी समिति सभापति अनिल मकरिये, विपक्ष के नेता अब्दुल समीर साजिद, नगरसेवक राजगौरव वानखेडे, महानगरपालिका आयुक्त अमोल येडगे, अतिरिक्त आयुक्त रणजीत पाटील, पर्यटन विभाग के उपायुक्त अंकुश पांढरे और सहायक आयुक्त ऋतुजा पाटील सहित बड़ी संख्या में इतिहासप्रेमी, विद्यार्थी और नागरिक शामिल हुए।

संरक्षण के लिए मिलकर काम करने का संदेश

इस पहल के जरिए शहर के प्रसिद्ध स्मारकों से आगे बढ़कर महमूदपुरा जैसे क्षेत्रों में मौजूद कम चर्चित ऐतिहासिक और स्थापत्य धरोहरों की ओर नागरिकों का ध्यान आकर्षित किया गया। मलिक अंबर की जल प्रबंधन व्यवस्था और नगर नियोजन की दूरदर्शिता से लेकर क्षेत्र की विविध स्थापत्य परंपराओं तक, प्रतिभागियों को शहर की बहुआयामी विरासत को करीब से जानने का अवसर मिला।

हेरिटेज वॉक ने यह संदेश भी दिया कि ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के लिए केवल प्रशासनिक प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। नागरिकों, स्थानीय प्रशासन और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं के बीच समन्वय भी उतना ही जरूरी है। ऐसी पहलें नागरिकों को अपनी ऐतिहासिक धरोहर से जोड़ने के साथ उसके संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी पैदा करती हैं।

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