Nashik: कुंभ मेले की तैयारी शुरू, कालाराम मंदिर में स्थापित हुआ अयोध्या शैली का भव्य पीतल धर्मध्वज

Nashik Kalaram Mandir: नासिक के कालाराम मंदिर में अयोध्या की शैली पर आधारित 21ft ऊंचा पीतल ध्वज स्तंभ स्थापित किया गया। पूर्व राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में यह धार्मिक समारोह संपन्न हुआ।
Devendra Fadanvis In Kalaram Mandir
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कालाराम मंदिर में दर्शन करते हुए (सोर्स - X @Dev_Fadnavis)
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Nashik Kalaram Mandir: नासिक में आगामी कुंभ मेले की पूर्व तैयारी के रूप में नाशिक के आस्था केंद्र, प्रभु श्रीराम के ऐतिहासिक कालाराम मंदिर में 21 फीट ऊंचा भव्य पीतल का धर्मध्वज स्तंभ स्थापित किया गया है। बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की गरिमामयी उपस्थिति में इस ध्वज स्तंभ का लोकार्पण और यज्ञ-पूजन संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर पूरे मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति का वातावरण देखा गया।

अयोध्या की स्थापत्य शैली का अनूठा संगम

इस भव्य धर्मध्वज का निर्माण अयोध्या स्थित नवनिर्मित श्रीराम मंदिर की शैली के आधार पर किया गया है। समारोह के दौरान ढोल-ताशों की गूंज और शंखनाद के साथ पूरा परिसर 'जय श्रीराम' के उद्घोष से भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम में कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन, महापौर हिमगौरी आडके-आहेर और उपमहापौर विलास शिंदे सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंदिर को विशेष फूलों और आकर्षक विद्युत रोशनी से सजाया गया था।

सागवान और पीतल की कलाकारी से बना ध्वजदंड

इस ध्वजदंड को बनाने में विशेष सामग्री और पारंपरिक कला का उपयोग किया गया है। कालाराम मंदिर के लगभग 70 फीट ऊंचे शिखर पर स्थापित यह नया ध्वजदंड 21 फीट ऊंचा है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले सागवान की लकड़ी का आधार दिया गया है और बाहर से पीतल का आवरण चढ़ाया गया है। इस स्तंभ पर 11.5 फीट का रेशमी भगवा ध्वज फहराया गया है, जिस पर सूर्य, ॐ, हनुमान और गरुड़ की आकृतियां अंकित की गई हैं।

गोदाघाट पर महाआरती और सुरक्षा व्यवस्था

धार्मिक अनुष्ठानों के पश्चात गोदावरी तट (गोदाघाट) पर भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। पूर्व राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में इसे सामाजिक एकता का प्रतीक बताया, वहीं मुख्यमंत्री ने नासिक के धार्मिक और सांस्कृतिक वैभव की प्रशंसा की। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे। यह आयोजन नासिक के गौरवशाली इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है।

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