Akola News: लाडकी बहीन योजना पर VBA का आरोप, SC-ST विकास निधि के 14,601 करोड़ डायवर्ट करने का दावा

Vanchit Bahujan Aghadi: VBA प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र पातोडे ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए आरक्षित 14,601.13 करोड़ रुपये की निधि लाडली बहन योजना की ओर डायवर्ट की गई।
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लाडली बहन योजना (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Akola Ladki Behin Yojana: मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीन योजना के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए आरक्षित 14,601.13 करोड़ रु. का फंड अब तक डायवर्ट किए जाने का आरोप वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) के प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र पातोडे ने लगाया है। उन्होंने यह निधि तत्काल संबंधित विभागों को वापस करने की मांग करते हुए पूर्व सूचना दी कि 15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो सामाजिक न्याय एवं आदिवासी विकास मंत्रियों के निवासस्थानों पर मोर्चे निकाले जाएंगे। वे शनिवार को सरकारी विश्रामगृह में आयोजित पत्र परिषद में बोल रहे थे।

उन्होंने ने कहा कि केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास आठवले, आदिवासी मंत्री अशोक उईके और महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाठ की मौजूदगी में अनु. जाति-जनजाति का फंड लाडली बहन योजना की ओर मोड़ा जा रहा है, फिर भी मंत्री चुप क्यों हैं? उन्होंने कैग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए योजना के आर्थिक प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए, 3,541 करोड़ अतिरिक्त खर्च का दावा राजेंद्र पातोडे के अनुसार, सरकार ने निर्धारित बजट से 3,541.16 करोड़ रु. अधिक खर्च किए, लेकिन अतिरिक्त खर्च का ठोस औचित्य नहीं दिया गया।

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VBA ने दी आंदोलन की चेतावनी

जनवरी से मार्च 2025 के दौरान निकाली गई 15,586 करोड़ रु. की राशि सीधे लाभार्थियों को देने के बजाय 'वर्चुअल पर्सनल डिपॉजिट अकाउंट्स' में रखी गई। कैग ने इसे आर्थिक अनुशासन की कमी और अनियमितता बताया है। उन्होंने कहा कि सिस्टम की खामियों के कारण 14,298 पुरुषों को 1,500 रु. प्रतिमाह के हिसाब से करीब 21.44 करोड़ रु. का गलत लाभ दिया गया। इसके अलावा अपात्र महिलाओं तथा एक ही परिवार के कई सदस्यों को लाभ मिलने से भी सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।

विकास निधि रोकने का आरोप

उन्होंने ने आरोप लगाया कि सड़क, स्कूल, आवास और जलापूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं के बजाय निधि लोकप्रिय योजनाओं की ओर मोड़ी जा रही है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अनु। जाति-जनजाति के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास के लिए मंजूर निधि उसी समाज के विकास पर खर्च होनी चाहिए। पत्र परिषद में अरुंधति शिरसाठ, अशोक सोनाने, एड. नतीकोद्दीन खतीब, डॉ. धैर्यवर्धन पुंडकर, पार्षद पराग गवई, नीलेश देव, पूर्व जि.प. अध्यक्ष संगीता आढाऊ, शोभा शेलके, नितिन सपकाल सहित वीबीए के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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