महानगरपालिका ने 10-10 प्रतिशत दंड को पूरी तरह माफ करने का निर्णय फोटो सोर्स- नवभारत
छत्रपति संभाजीनगर

छत्रपति संभाजीनगर: नगरसेवकों के आगे झुका मनपा प्रशासन, 5% नहीं, पूरा 10% गुंठेवारी पेनल्टी चार्ज माफ

Sambhajinagar News: मनपा ने गुंठेवारी नियमितीकरण पर 10-10 प्रतिशत दंड पूरी तरह माफ कर दिया है। इससे नागरिकों को बड़ी आर्थिक राहत मिली है। नियमितीकरण के लिए 31 अक्टूबर तक आवेदन का अंतिम मौका है।

शफीउल्ला हुसैनी, प्रमोद यादव

Chhatrapati Sambhajinagar Gunthewari Regularization Penalty: छत्रपति संभाजीनगर गुंठेवारी नियमितीकरण के लिए भारी भरकम शुल्क से परेशान शहरवासियों को महानगरपालिका ने बड़ी राहत दी है। अ‍ॅन्सलरी और मार्जिन साइड पर लगाए गए 10-10 प्रतिशत दंड को पूरी तरह माफ करने का निर्णय सोमवार को हुई।

महानगरपालिका की सर्वसाधारण सभा में सर्वसम्मति से लिया गया। प्रशासन की ओर से पहले दंड में 5% कमी करने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन नगरसेवकों की जोरदार मांग के बाद पूरा दंड माफ करने पर सहमति बनी।

इस निर्णय से गुंठेवारी नियमितीकरण के लिए नागरिकों को पहले की तुलना में काफी कम राशि खर्च करनी पड़ेगी। महापौर समीर राजूरकर की अध्यक्षता में हुई। चर्चा के बाद अ‍ॅन्सलरी और मार्जिन साइड पर लगाए गए 10 प्रतिशत दंड को पूरी तरह समाप्त करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से मंजूर किया गया।

लाखों रुपये के शुल्क से नागरिक कर रहे थे गुंठेवारी से परहेज

मनपा प्रशासन ने गुंठेवारी नियमितीकरण के लिए मकानों पर लगने वाला बेटरमेंट चार्ज पूरी तरह माफ किया था। हालांकि, अ‍ॅन्सलरी और मार्जिन साइड के लिए शुल्क के साथ दंड भी लगाया गया था। अ‍ॅन्सलरी के लिए 10 प्रतिशत शुल्क और उस पर 10 प्रतिशत दंड तथा मार्जिन साइड के लिए भी 10 प्रतिशत शुल्क और 10 प्रतिशत दंड निर्धारित किया गया था।

रेडी रेकनर दर के आधार पर शुल्क की गणना होने के कारण कई संपत्तियों के नियमितीकरण की राशि लाखों रुपये तक पहुंच रही थी। इसके चलते नागरिकों में गुंठेवारी नियमितीकरण को लेकर उत्साह नहीं था। कई नागरिक आर्थिक बोझ के कारण अपनी संपत्तियों का नियमितीकरण कराने से पीछे हट रहे थे।

दंड में पांच प्रतिशत कमी के प्रस्ताव पर हुई जोरदार बहस

नागरिकों की परेशानी को देखते हुए इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। इसके बाद मनपा प्रशासन ने अ‍ॅन्सलरी और मार्जिन साइड पर लगाए गए दंड में पांच प्रतिशत कमी करने का प्रस्ताव सर्वसाधारण सभा के समक्ष रखा था। हालांकि, नगरसेवकों ने प्रशासन के इस प्रस्ताव को अपर्याप्त बताते हुए पूरी दंड राशि माफ करने की मांग की।

नगरसेवक अशोक दामले, पदमसिंग राजपूत, सविता कुलकर्णी, दया गायकवाड, अनिता मानकापे, प्रियंका खोतकर, कीर्ति शिंदे, रामदास हरणे, बालाजी मुंडे, नंदकुमार गवली, अजहर शेख, सचिन खैरे, राशिद मामू, गणेश लोंखडे, अर्चना निलकंठ, गोकुल मलके, अफसर खान और मतीन शेख ने चर्चा में भाग लिया।

नगरसेवकों ने कहा कि गुंठेवारी का उद्देश्य वर्षों से विकसित हो चुकी बस्तियों और मकानों को कानूनी मान्यता देकर नागरिकों को राहत देना है। ऐसे में अतिरिक्त दंड लगाने से नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। नगरसेवक पदमसिंग राजपूत ने गुंठेवारी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए वास्तुविशारदों का पैनल तैयार करने की मांग की। उनका कहना था कि तकनीकी प्रक्रिया के कारण नागरिकों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

आरक्षित जमीन पर बसी बस्तियों का भी उठा मुद्दा

नगरसेवक अफसर खान ने शहर की कई बस्तियों में मनपा की आरक्षित जमीन पर हुए निर्माण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आरक्षण के कारण इन बस्तियों की गुंठेवारी नियमितीकरण प्रक्रिया में बाधाएं आ रही हैं। प्रशासन की ओर से कई मामलों में नियमितीकरण से इनकार किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि जहां वर्षों से बस्तियां विकसित हो चुकी हैं, वहां आरक्षण हटाकर गुंठेवारी नियमितीकरण का रास्ता साफ किया जाए।

वर्ग-2 की जमीन पर बने 10 से 12 हजार मकानों का सवाल

नगरसेवक विजय औताडे और रामदास हरणे ने हर्सूल सहित शहर के विभिन्न क्षेत्रों में वर्ग-2 की जमीन पर विकसित हुई बस्तियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि इन बस्तियों में रहने वाले कई नागरिकों के नाम सातबारा दस्तावेजों में दर्ज हैं। इसके बावजूद जमीन वर्ग-2 की होने के कारण उनकी संपत्तियों की गुंठेवारी नहीं हो पा रही है। नगरसेवकों के अनुसार, इसके कारण शहर की करीब 10 से 12 हजार संपत्तियां गुंठेवारी नियमितीकरण से बाहर रह सकती हैं।

उन्होंने 23 जून को महसूल विभाग की ओर से जारी शासन निर्णय का हवाला देते हुए वर्ग-2 की जमीन पर बने मकानों को बिना अतिरिक्त शुल्क वर्ग-1 में परिवर्तित करने की प्रक्रिया अपनाने की मांग की। महापौर समीर राजूरकर ने  कहा कि जिलाधिकारी और मनपा आयुक्त शासन निर्णय का अध्ययन कर वर्ग-2 की जमीन के संबंध में उचित निर्णय लें।

52 झोपड़पट्टियों के नियमितीकरण का रास्ता भी खुल सकता है

नगरसेवक अमित भुईगल ने शहर की 52 घोषित झोपड़पट्टियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि ये झोपड़पट्टियां सरकारी यानी वर्ग-2 की जमीन पर बसी हुई हैं। नए शासन निर्णय का लाभ इन बस्तियों के नागरिकों को दिलाने के लिए महानगरपालिका प्रशासन को तत्काल पहल करनी चाहिए।

भुईगल ने कहा कि झोपड़पट्टियों में रहने वाले अनेक नागरिकों के पास संपत्ति से संबंधित पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं। शासन निर्णय की तत्काल अमल में लाने से इन नागरिकों को संपत्ति संबंधी अधिकार प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही पीआर कार्ड प्राप्त करने का रास्ता भी खुल सकता है।

31 अक्टूबर तक ही मिलेगा मौका

छत्रपति संभाजीनगर गुंठेवारी नियमितीकरण के लिए मनपा ने 31 अक्टूबर तक की समय सीमा निर्धारित की है। इसके बाद समय सीमा बढ़ाए जाने की संभावना नहीं है। महापौर समीर राजूरकर ने नागरिकों से अपील की कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना अपनी नियमितीकरण संचिका जल्द से जल्द जमा करें।

अ‍ॅन्सलरी और मार्जिन साइड पर लगाया गया 10-10 प्रतिशत दंड माफ होने के बाद अब नागरिकों को गुंठेवारी नियमितीकरण के लिए बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। मनपा के इस फैसले से लंबे समय से लंबित हजारों संपत्तियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।

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