प्रधान जिला न्यायाधीश गिरीश अग्रवाल को धमकी भरा ई-मेल मिला।
दोपहर 3:11 बजे न्यायालय खाली कराने का आदेश दिया गया।
पांच से सात मिनट में चार मंजिला इमारत खाली करा ली गई।
District Court Bomb Threat Email: छत्रपति संभाजीनगर जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सोमवार दोपहर न्यायालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। प्रधान जिला न्यायाधीश गिरीश अग्रवाल को ई-मेल के माध्यम से मिली धमकी में न्यायालय के अलावा मुंबई के महालक्ष्मी रेसकोर्स और मेट्रो स्टेशनों पर 27 नवंबर को विस्फोट करने का उल्लेख था।
खतरे की गंभीरता को देखते हुए दोपहर 3 बजकर 11 मिनट पर न्यायालय खाली करने का आदेश दिया गया। इसके बाद महज पांच से सात मिनट में पूरी इमारत खाली करा ली गई। वकीलों, कर्मचारियों, न्यायाधीशों और पक्षकारों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। सभी न्यायिक कार्य रोक दिए गए।
धमकी की सूचना मिलते ही पुलिस उपायुक्त रत्नाकर नवले, अपराध शाखा के निरीक्षक गजानन कल्याणकर और वेदांतनगर थाने के निरीक्षक पालवे पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। बम निरोधक दस्ता, श्वान दस्ता और अग्निशमन विभाग के जवानों ने मोर्चा संभाला। न्यायालय की चारों मंजिलों, कमरों, सभागारों और पूरे परिसर की सघन तलाशी ली गई।
त्वरित कार्रवाई दल ने प्रवेश द्वार पर सुरक्षा व्यवस्था संभाली। लगभग पांच घंटे तक तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। पुलिस की ओर से खतरा टलने का संदेश मिलने के बाद सभी ने राहत की सांस ली।
धमकी भरे संदेश में 1984 के सिख नरसंहार का बदला लेने संबंधी भड़काऊ सामग्री, खालिस्तान समर्थक नारे और खालिस्तान नेशनल आर्मी का उल्लेख होने की जानकारी सामने आई है। ई-मेल में मुंबई शहर के महालक्ष्मी रेसकोर्स और मेट्रो स्टेशनों पर विस्फोट करने की चेतावनी भी दी गई थी। हालांकि, ई-मेल वास्तव में किसी प्रतिबंधित संगठन की ओर से भेजा गया है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस उपायुक्त रत्नाकर नवले ने बताया कि सुरक्षा के सभी निर्धारित उपायों के तहत पांच घंटे तक जांच की गई। कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। एहतियात के तौर पर न्यायालय परिसर में पुलिस बंदोबस्त जारी रहेगा। धमकी भरा ई-मेल भेजने वाले की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले मुंबई उच्च न्यायालय की छत्रपति संभाजीनगर पीठ को भी धमकी भरे फोन आ चुके हैं। अब जिला न्यायालय को ई-मेल से मिली धमकी ने न्यायालयों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।