Explainer: न अनाथालय, न वृद्धाश्रम... नीता अंबानी का 100 एकड़ में बनेगा अनंत आश्रय, जानें क्या है खास?

Nita Ambani Anant Ashray Project: नीता अंबानी का अनंत आश्रय कर्जत में 100 एकड़ में विकसित होने वाला एक खास प्रोजेक्ट है। यहां 5,000 से अधिक अनाथ बच्चों और कौशल विकास जैसी कई सुविधाएं प्रस्तावित हैं।
Nita Ambani Anant Ashray Karjat full details
ईशा अंबानी और नीता अंबानी(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Highlights

  • रिलायंस फाउंडेशन द्वारा कर्जत में 100 एकड़ में अनंत आश्रय की शुरुआत।

  • यह परिसर वृद्धाश्रमों और अनाथालयों से अलग पारिवारिक आवासीय टाउनशिप है।

  • इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य अनाथ बच्चों और दिव्यांगजनों को सुरक्षित आशियाना देना है।

Nita Ambani Anant Ashray Project Karjat Full Details: कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह की, जहां अनाथ बच्चों को परिवार जैसा माहौल मिले, बुजुर्गों को सम्मान के साथ जीने का सहारा और दिव्यांगजनों को जिंदगीभर देखभाल की सुविधा। यानी एक ऐसा घर, जहां किसी को अकेलेपन या भविष्य की चिंता से न जूझना पड़े। इसी सोच के साथ नीता मुकेश अंबानी ने महाराष्ट्र के कर्जत में अनंत आश्रय बनाने की पहल की है।

करीब 100 एकड़ में विकसित होने वाले इस परिसर में अनाथ बच्चों, बुजुर्गों और शारीरिक व विकासात्मक दिव्यांगता वाले लोगों के लिए रहने की व्यवस्थाएं प्रोजेक्ट में शामिल हैं। यहां सिर्फ रहने की जगह ही नहीं, बल्कि अस्पताल, शिक्षा, पुनर्वास और कौशल विकास जैसी सुविधाएं भी देने की योजना है। आखिर क्या है यह पूरा प्रोजेक्ट, कैसे काम करेगा और किन लोगों को इसका लाभ मिल सकता है? आइए, समझते हैं।

अनंत आश्रय क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुई?

रिलायंस फाउंडेशन की संस्थापक और अध्यक्ष नीता अंबानी ने 1 नवंबर 2026 को अपने 62वें बर्थडे पर मुंबई के पास कर्जत में नीता मुकेश अंबानी अनंत आश्रय की घोषणा की और ईशा अंबानी के साथ इसका भूमि पूजन व शिलान्यास किया।

करीब 100 एकड़ में बनने वाला यह परिसर एक स्थायी और नॉट फोर प्रॉफिट संस्थान के रूप में चरणों में विकसित किया जाएगा। रिलायंस फाउंडेशन के वी केयर फिलॉसोफी पर आधारित इस पहल का मुख्य उद्देश्य अनाथ बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और शारीरिक व विकासात्मक दिव्यांगताओं से जूझ रहे लोगों को जीवनभर के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और स्नेहमय आशियाना देना है।

वृद्धाश्रमों या अनाथालयों से यह अलग कैसे होगा?

अनंत आश्रय को किसी बंद या पारंपरिक केयर होम की तरह नहीं, बल्कि एक जीवंत आवासीय टाउनशिप के रूप में डिजाइन किया गया है। यहां बड़े-बड़े हॉस्टल या डोरमेट्री के बजाय छोटे, फैमिली-स्टाइल के घर होंगे। हर घर में समर्पित हाउस पेरेंट्स और केयरगिवर्स रहेंगे, जो निवासियों को एक नैचुरल पारिवारिक माहौल देंगे।

पूरे 100 एकड़ परिसर को भारत की 8 पवित्र नदियों के नाम पर बने 8 आवासीय गांवों में विभाजित किया गया है। न्यूरोडायवर्सिटी, दृष्टिबाधित या किसी भी चुनौतियों से जूझ रहे निवासियों को रास्ते पहचानने में आसानी हो, इसके लिए हर गांव का अपना अलग रंग, प्रतीक और सेंसरी गार्डन होगा। निवासियों को अपने कमरों में अपनी पसंदीदा तस्वीरें, रंग और निजी वस्तुएं रखने की पूरी आजादी होगी।

कितने लोग रहेंगे और कौन-कौन सी मुख्य सुविधाएं मिलेंगी?

इसके अलावा, रिलायंस की वंतारा पहल के सहयोग से एक एनिमल कंपैनियनशिप फार्म भी बनाया जाएगा, जहां जानवरों के साथ थेरेप्यूटिक संवाद से मानसिक तनाव कम करने और बच्चों में भावनात्मक संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।

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माता-पिता की आफ्टर-अस चिंता का समाधान

गंभीर स्थितियों जैसे सेरेब्रल पाल्सी, ऑटिज्म, मिर्गी से पीड़ित बच्चों के माता-पिता की सबसे बड़ी मानसिक चिंता होती है कि हमारे न रहने के बाद हमारे बच्चे का ध्यान कौन रखेगा?

नीता अंबानी ने इस परियोजना को माताओं की इसी गहरी चिंता के स्थायी समाधान के रूप में प्रस्तुत किया है। हर निवासी के लिए एक पर्सनल देखभाल और विकास योजना तैयार की जाएगी, जिसकी हर 6 महीने पर समीक्षा की जाएगी ताकि उनकी उम्र और जरूरतों के हिसाब से चिकित्सा, शिक्षा व सामाजिक विकास का दायरा बदला जा सके।

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स्थानीय क्षेत्र और देश के लिए इसका महत्व

भारत में दिव्यांगता और बुजुर्गों की देखभाल के क्षेत्र में कुशल पेशेवरों की कमी को दूर करने के लिए यहां एक अकादमी बनेगी, जो देशभर के लिए प्रशिक्षित केयरगिवर्स तैयार करेगी। कर्जत और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लगभग 1,000 लोग यहां की चिकित्सा, थेरेपी और रोजगार सुविधाओं का सीधे लाभ उठा सकेंगे।

बाहरी परिवारों को अल्पकालिक राहत देने के लिए रेस्पाइट होम और ग्रामीण इलाकों के लिए मोबाइल मेडिकल क्लिनिक चलाए जाएंगे।

मतलब, अनंत आश्रय केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि चिकित्सा, परिवार, रोजगार और सामाजिक सम्मान को एक साथ जोड़ने वाला सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर का एक नया मॉडल है।