

महाराष्ट्र जल्द देश की सबसे निवेशक अनुकूल समुद्री विकास नीति लाने की तैयारी में है।
परियोजना से लगभग 50 हजार रोजगार के अवसर बनने की संभावना जताई गई है।
नीदरलैंड का जहाज निर्माण प्रतिनिधिमंडल फरवरी 2027 में भारत आएगा।
Maharashtra Shipbuilding Investment: महाराष्ट्र सरकार जल्द ही समुद्री विकास नीति की घोषणा करेगी, जो इस उद्योग क्षेत्र की देश की सबसे अधिक निवेशक अनुकूल नीति होगी। देश में जहाज निर्माण और बंदरगाह क्षेत्र में बढ़ते निवेश का बड़ा हिस्सा हासिल करने के लिए महाराष्ट्र अपने कोस्टल पड़ोसी राज्यों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है। यह बात महाराष्ट्र के मत्स्य एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने कही।
उद्योग संगठन 'फिक्की' द्वारा आयोजित ‘समुद्री भारत सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मंत्री नितेश राणे ने कहा कि राज्य में निवेशकों को विशेष सुविधाएं प्रदान की जाएंगी और सभी आवश्यक अनुमतियां एकल खिड़की व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी।
राणे ने पिछले महीने महाराष्ट्र सरकार, केंद्र सरकार और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके अंतर्गत देश के सबसे बड़े जहाज निर्माण केंद्र की स्थापना की जाएगी। इस परियोजना में 26,500 करोड़ रुपये का निवेश होगा और लगभग 50,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
बंदरगाह विकास मंत्री राणे ने कहा कि पिछले वर्ष आयोजित भारत समुद्री शिखर सम्मेलन में महाराष्ट्र सरकार द्वारा किए गए सभी निवेश समझौते अब वास्तविक निवेश में परिवर्तित हो चुके हैं। राज्य सरकार ने अपने पहले 100 दिनों के भीतर जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत और जहाज तोड़ने संबंधी नीति भी जारी की थी।
इस नीति के अंतर्गत सरकार निवेशकों को पर्यावरण संबंधी अनुमतियां प्राप्त करने और भूमि अधिग्रहण में सहायता प्रदान करेगी। नितेश राणे कहा कि ये दोनों कार्य जहाज निर्माण उद्योग के विकास में प्रमुख बाधाएं रहे हैं। सम्मेलन में फिक्की के नव निर्वाचित अध्यक्ष एवं सन्मार ग्रुप के अध्यक्ष विजय शंकर ने कहा कि वर्ष 2025-26 में देश के प्रमुख बंदरगाहों ने रिकॉर्ड 91.5 करोड़ टन माल का संचालन किया, जो निर्धारित लक्ष्य से अधिक रहा।
इस दौरान माल संचालन में 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जहाज निर्माण और समुद्री क्षेत्र के लिए घोषित 70,000 करोड़ रुपये का सहायता पैकेज राज्यों के लिए एक बड़ा अवसर है। शंकर ने कहा कि भारत में समुद्री क्षेत्र का बदलाव केवल बुनियादी ढांचे के विकास की कहानी नहीं है, बल्कि यह आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता, सामरिक क्षमता और राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा से जुड़ा विषय है।
उन्होंने फिक्की के सदस्यों की ओर से तीन प्रमुख प्राथमिकताएं रखीं। इनमें एकीकृत व्यवस्था के रूप में काम करने वाला बुनियादी ढांचा, सरकारी नीतिगत सहयोग के अनुरूप उद्योगों द्वारा निवेश तथा भारत के व्यापार से अधिक आर्थिक लाभ सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने भारतीय जहाजों के माध्यम से भारतीय माल की ढुलाई बढ़ाने पर भी जोर दिया।
इस साल फिक्की के इस सम्मेलन में नीदरलैंड साझेदार देश के रूप में शामिल हुआ। नीदरलैंड के वाणिज्य दूत एवं उप मिशन प्रमुख महामहिम थिएरी वान हेल्डेन ने भारत और नीदरलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी को व्यावसायिक परियोजनाओं में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने घोषणा की कि नीदरलैंड का एक विशेष जहाज निर्माण प्रतिनिधिमंडल फरवरी 2027 में भारत का दौरा करेगा।
सम्मेलन को जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण के अध्यक्ष गौरव दयाल, भारतीय जहाजरानी निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक बिनेश त्यागी, महानिदेशालय समुद्री प्रशासन के नौवहन सलाहकार एवं अतिरिक्त महानिदेशक एस.आई. अबुल कलाम आजाद, ओडिशा सरकार के वाणिज्य एवं परिवहन विभाग के प्रधान सचिव एन.बी.एस. राजपूत, फिक्की की बंदरगाह एवं जहाजरानी समिति के अध्यक्ष तथा जेएम बक्सी के प्रबंध निदेशक ध्रुव कोटक ने भी संबोधित किया।