Shalarth ID Scam SIT Investigation: छत्रपती संभाजीनगर में बोगस शालार्थ आईडी घोटाले की जांच अब तेज हो गई है। गुरुवार को शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव के नेतृत्व में अधिकारियों ने जिला परिषद की दो शालाओं का अचानक निरीक्षण किया।
वहीं एसआईटी के एक दल ने जिला परिषद में संच मान्यता। फर्जी कक्षा मंजूरी और शालाओं की मान्यता से संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की। सूत्रों के अनुसार। जांच के दौरान कई दस्तावेजों पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
जांच दल ने उन शालाओं की भी पड़ताल की। जहां पर्याप्त छात्र संख्या नहीं होने के बावजूद कक्षाओं और शिक्षकों को मंजूरी दिए जाने के आरोप हैं। इसमें एक पूर्व मंत्री से जुड़े विधायक की शाला का नाम भी सामने आने से शिक्षा क्षेत्र में हलचल मच गई है।
जांच में वर्ष 2011 से अस्तित्व में नहीं होने वाली शालाओं के नाम पर संचालित कक्षाओं और शिक्षकों को मंजूरी देने के मामलों की भी पड़ताल की जा रही है। इसके अलावा फर्जी आधार कार्ड के आधार पर छात्र संख्या बढ़ाकर सरकारी वेतन अनुदान प्राप्त करने के आरोपों की जांच हो रही है।
बंद गैर-अनुदानित शालाओं के नाम पर 20 से 80 प्रतिशत तक अनुदान स्वीकृत किए जाने के मामलों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। फर्जी TET प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों की भी जांच शुरू कर दी गई है। कंप्यूटर के माध्यम से फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने वाले कथित बिचौलियों पर भी एसआईटी की नजर है।
घोटाले में जिम्मेदार माने जा रहे सेवानिवृत्त अधिकारियों के कार्यकाल में मंजूर किए गए मामलों की फाइलें भी जांची जा रही हैं। इनमें आर.एस. मोगल, सूरज जैस्वाल, गजानन सुसर और बी. चव्हाण सहित वर्तमान शिक्षा अधिकारी के कार्यकाल के मामलों की भी पड़ताल की जा रही है।
इस मामले में महमूद खान की ओर से वर्ष 2025 में शिक्षा सचिव और तत्कालीन शिक्षा मंत्री दादा भुसे से की गई शिकायत को भी जांच में शामिल किया गया है।
जांच दल ने जातेगांव जिला परिषद शाला में पहुंचकर छात्र संख्या और शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच की। वहीं सिल्लोड की एक नेता से संबंधित शाला में दूसरी शाला के विद्यार्थियों को प्रवेश दिखाए जाने के आरोप की भी पड़ताल की गई।
जांच अधिकारियों को छात्र संख्या में इस तरह की हेराफेरी पर संदेह है। शुक्रवार को भी छत्रपति संभाजीनगर में कई शालाओं और दस्तावेजों की जांच जारी रहने की संभावना है।