सहकारी बैंक पर भाजपा का एकतरफा कब्जा (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
चंद्रपुर

70 साल बाद चंद्रपुर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक पर भाजपा का एकतरफा कब्जा

Chandrapur District Bank: चंद्रपुर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (सीडीसीसी) के 7 दशक के इतिहास में पहली बार भाजपा ने अकेले दम पर सत्ता हासिल की है। जानिए कौन बने अध्यक्ष-उपाध्यक्ष...

आंचल लोखंडे

Chandrapur District Bank: चंद्रपुर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (सीडीसीसी) के 7 दशकों के इतिहास में पहली बार भाजपा ने अकेले दम पर सत्ता हासिल की है। रवींद्र शिंदे निर्विरोध अध्यक्ष और संजय डोंगरे उपाध्यक्ष चुने गए हैं। इस जीत पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्न मनाया। भाजपा की अकेले दम पर जीत के बाद नेताओं ने कहा कि "देवेंद्र राज्य में और रवींद्र जिला बैंक में हैं" और विश्वास जताया कि आने वाले दिनों में किसानों, गरीबों और महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रभावी काम शुरू होगा।

यह पहले से ही स्पष्ट था कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए भाजपा उम्मीदवार 17 संचालकों का समर्थन हासिल करने के बाद निर्विरोध चुने जाएंगे। मंगलवार सुबह 11 बजे जिला बैंक सभागार में हुई बैठक में अध्यक्ष पद के लिए रवींद्र शिंदे और उपाध्यक्ष पद के लिए संजय डोंगरे के नामांकन प्राप्त हुए। विरोधी गुट की ओर से कोई नामांकन दाखिल न होने पर चुनाव अधिकारियों ने दोनों के निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा कर दी।

भाजपा कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया और अभिनंदन किया

इस ऐतिहासिक जीत की पृष्ठभूमि में भाजपा कार्यकर्ताओं ने बैंक के सामने पटाखे फोड़कर अपनी खुशी का इजहार किया। इसके बाद, माननीय एस. कन्नमवार हॉल में नवनियुक्त अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और निदेशकों का अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष हंसराज अहीर, विधायक कीर्तिकुमार भांगड़िया, विधायक किशोर जोरगेवार, विधायक करण देवताले, पूर्व मंत्री रमेशकुमार गजभे, पूर्व विधायक संजय धोटे और अन्य भाजपा नेता उपस्थित थे।

कांग्रेस निदेशकों का गुप्त समर्थन?

इस चुनाव में यह साफ़ हो गया कि कुछ कांग्रेस निदेशकों का भाजपा गुट को गुप्त समर्थन है। ज़्यादातर कांग्रेस निदेशक सम्मान समारोह में अनुपस्थित रहे। हालांकि, उन्होंने सीईओ के कमरे में ए. भंगड़िया का सम्मान करके अप्रत्यक्ष रूप से अपना समर्थन जताया।

सांसद प्रतिभा धानोरकर का सपना अधूरा

शुरुआत में कांग्रेस ने दावा किया था कि कांग्रेस के पास 12 और भाजपा के पास 9 निदेशक हैं। इसलिए, सांसद प्रतिभा धानोरकर ने अध्यक्ष पद की उम्मीद जताई थी। हालांकि, रवींद्र शिंदे के महा विकास अघाड़ी छोड़ने के बाद, उनका झुकाव भाजपा की ओर हो गया और कांग्रेस का गणित बिगड़ गया। नतीजतन, चर्चा है कि धानोरकर का सपना अधूरा रह गया।

क्या एसआईटी जांच रुकेगी?

कुछ महीने पहले बैंक भर्ती में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोप लगे थे। एसआईटी के ज़रिए जांच शुरू की गई थी। 8 जुलाई को एसआईटी का गठन किया गया था। लेकिन अब जब राज्य, केंद्र और बैंक में भाजपा सत्ता में आ गई है, तो क्या यह जांच रुकेगी? यह सवाल उम्मीदवारों और नागरिकों के बीच पूछा जा रहा है।

अंबानी को पछाड़ अडानी ने मारी बाजी, देश के अमीरों में 15 नए नाम शामिल, ये रही लिस्ट

Election Commission SIR Row: ECs में मतभेद का खुलासा, CEC ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग, किसने क्या कहा?

Bank Strike: बैंक हड़ताल से पहले सरकार का बड़ा फैसला, 25 सितंबर को ही खाते में आएगी सैलरी-पेंशन

मुसलमानों को निशाना बनाकर दिया जा रहा राजनीतिक संदेश... सपा नेता अबू आजमी ने बोला हमला

संजय दत्त की बहन ने ज्वाइन की नीतीश कुमार की पार्टी, JDU ने SAD-SAS से गठबंधन कर पंजाब में बनाया नया मोर्चा