Chandrapur Jalyukt Shivar 2.0 News: 'अल नीनो' के प्रभाव के कारण इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना जताई गई है। ऐसी स्थिति में वर्षा जल का अधिकतम संचयन कर उसका उपयोग खेती के लिए करने तथा भूजल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा 'जलयुक्त शिवार अभियान 2.0' चलाया जा रहा है। शासन स्तर पर अभियान की नियमित समीक्षा की जा रही है, इसलिए जिले में विभिन्न विभागों द्वारा स्वीकृत कार्यों को शीघ्न पूरा किया जाए, ऐसे निर्देश जिलाधिकारी वसुमना पंत ने संबंधित विभागों को दिए।
जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में अभियान के अंतर्गत प्रस्तावित कार्यों की प्रगति का जायजा लेते हुए वे बोल रही थीं। इस अवसर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंह, उपवनसंरक्षक कुमारस्वामी, उपविभागीय अधिकारी विशालकुमार मेश्राम, उपजिलाधिकारी (मनरेगा) शुभम दांडेकर, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी शंकर तोटावार, जिला जलसंधारण अधिकारी निलीमा मंडपे तथा ग्रामीण पेयजल विभाग के कार्यकारी अभियंता श्री बेलपत्रे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में जिलाधिकारी पंत ने कहा कि उपविभागीय स्तर पर गठित समितियों की तत्काल बैठक आयोजित की जाए और संबंधित विभाग अपने-अपने क्षेत्र में स्वीकृत कार्यों की समीक्षा करें। कितने कार्य शुरू हुए, कितने पूर्ण हुए तथा शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। जो कार्य पूर्ण हो चुके हैं, उनका नियमित रूप से पोर्टल पर मैपिंग और अपलोड किया जाए, क्योंकि अपलोड नहीं होने से जिले की प्रगति कम दिखाई देती है।
चंद्रपुर जिले में जलयुक्त शिवार अभियान 2।0 के तहत 232 गांवों का चयन किया गया है। अभियान के अंतर्गत कुल 3357 कार्य प्रस्तावित हैं। इनमें से 3099 कार्य शुरू हो चुके हैं तथा 2918 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। शुरू किए गए कार्यों का प्रतिशत 92.31 जबकि पूर्ण कार्यों का प्रतिशत 86.92 बताया गया है।
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जिलाधिकारी पंत ने यह भी निर्देश दिए कि जो ठेकेदार काम में लापरवाही कर रहे हैं या टालमटोल कर रहे हैं, उन्हें कड़ी चेतावनी देकर कार्य पूरा कराया जाए, अन्यथा उनका ठेका रद्द किया जाए। जिन कार्यों के लिए प्रशासनिक मंजूरी आवश्यक है, उनके प्रस्ताव तत्काल प्रस्तुत किए जाएं तथा आवश्यक नए कार्य भी शीघ्र स्वीकृत किए जाएं। बैठक में राजस्व, कृषि, वन, मृदा एवं जलसंधारण, सिंचन, सामाजिक वनीकरण, मनरेगा, ग्रामीण जलापूर्ति तथा भूजल सर्वेक्षण एवं विकास विभाग के कार्यों की भी समीक्षा की गई।