Bhandara Water Conservation: प्रतिवर्ष ग्रीष्मकाल के समय जल किल्लत का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस साल कुछ ज्यादा ही गर्मी के चलते जल की किल्लत है। जलप्रबंधन के अभाव के चलते कुएं, तालाब, नाली, बोरवेल सूख गये हैं। परिणामस्वरूप भूजल संचय कम हुआ हैं। भविष्य में जलसकंट पर परिसर में हल निकालने के लिए उपाय योजना करना आवश्यक हैं। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग यह एक अच्छा उपक्रम है, इसके लिए तहसील के नागरिकों को पहल करने की आवश्यकता है।
हर जगह पानी प्रचुर मात्रा में हो, जल स्तर बढ़े, इसके लिए जल संरक्षण को एक जन आंदोलन बनाने की जरूरत है। खेती के साथसाथ पेयजल के लिए आज भी ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में भटकना पड़ रहा है। जल विशेषज्ञ यह राय व्यक्त कर रहे हैं कि यदि भावी पीढ़ी के लिए जल का संरक्षण करना है तो आज ही योजना बनाने की आवश्यकता है।
पानी की कमी की समस्या हर साल और भी गंभीर होती जा रही है। इसके लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाया जा रहा है। पानी का उत्पादन नहीं किया जा सकता लेकिन बारिश के पानी को रोकना और निकालना हमारे हाथ में है। तहसील के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार करना समय की आवश्यकता है।
आधुनिकीकरण से सीमेंट का जाल बुना जा रहा है। इससे पानी जमीन में उस तरह नहीं रिस पाता जैसा कि जाना चाहिए। वर्षा ऋतु में भी जल को मिट्टी में समाहित होने में काफी समय लगता है, इससे सिंचाई क्षमता में वृद्धि हुई है, लेकिन इसकी तुलना में जल पुनर्भरण की प्रक्रिया शून्य है। जल एक राष्ट्रीय संपत्ति है।
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इसलिए कल की पीढ़ी के लिए आज ही जल की योजना बनाने की जरूरत है। वर्षा के पानी को रोककर जमीन में उतारने के अलावा कोई उपाय नहीं है। नगर परिषद द्वारा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के बिना घर बनाने की मंजूरी नहीं देनी चाहिए।
पूर्व नगरसेवक रवि परशुरामकर ने कहा कि, हर साल गर्मियों में पानी के लिए भटकना पड़ता है और इस साल तो सभी जगहों पर कुछ ज्यादा ही जल किल्लत हुई इसलिए यदि हर घर में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाए, तो काफी हद तक इस समस्या का समाधान हो सकता है।