नागपुर के दम तोड़ते जलाशयों को मिला नया जीवन! 'गाद-मुक्त बांध' योजना से बढ़ा जलस्तर, किसानों की चांदी

Nagpur Galmukt Dharan: नागपुर में गादमुक्त धरण और गालयुक्त शिवार योजना से तालाब, बांध और चेक-डैम पुनर्जीवित हो रहे हैं। इससे जल संरक्षण मजबूत हुआ है और किसानों की जमीन अधिक उपजाऊ बन रही है।
Nagpur's dying water bodies get a new lease of life! 'Silt-free dam' scheme boosts water levels, bringing a windfall for farmers.
नागपुर, जल संरक्षण, गादमुक्त बांध, किसान, सिंचाई,प्रतीकात्मक तस्वीर(सोर्स: सौजन्य AI)
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Nagpur Water Conservation: नागपुर जिले में दशकों से उपेक्षित पड़े तालाबों, बांधों और चेक-डैम के लिए 'गालमुक्त धरण (गाद-मुक्त बांध) और गालयुक्त शिवार' योजना वरदान साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से जलाशयों में जमा गाद को बाहर निकालकर उन्हें नई जिंदगी दी गई है जिससे न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिला है बल्कि किसानों की खेती भी उपजाऊ बन रही है।

3 वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति

पिछले 3 वर्षों में जिले में कुल 17 लाख 34 हजार 918 घनमीटर गाद निकाली गई है। इस महत्वाकांक्षी अभियान के कारण लगभग 3,500 किसानों को सीधा लाभ मिला है। मृदा एवं जल संरक्षण विभाग द्वारा संचालित इस योजना में जिला परिषद और जल संसाधन विभाग ने समन्वय के साथ काम किया है। काम का विस्तार : जिला परिषद ने 2023 से 2026 के बीच 79 कार्य पूर्ण किए हैं। इसके अलावा, जल संसाधन विभाग के दक्षिण संभाग ने 10 और उत्तर संभाग ने 1 कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।

अनुदान का प्रावधान

  • सस्कार प्रति घनमीटर 35.75 रुपये की दर से सहायता प्रदान करती है।
  • एक किसान को प्रति एकड़ अधिकतम 15,000 रुपये और ढाई एकड़ तक अधिकतम 37,500 रुपये का अनुदान मिल सकता है।

क्षमता में वृद्धि

इस गाद-निकासी प्रक्रिया से कई जलाशयों की जल धारण क्षमता में 40 से 60 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जलाशयों से निकाली गई गाद किसानों को मुफ्त या बहुत कम खर्च पर दी जाती है जो उनके खेतों की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती है, साथ ही गाद ढोने वाले किसानों को सरकार द्वारा सब्सिडी भी दी जाती है।

लक्ष्य पर लगातार काम जारी

जिला जल संरक्षण अधिकारी राजेंद्रकुमार श्याम के अनुसार अल नीनो के खतरे को देखते हुए जिला परिषद के लघु सिंचाई विभाग को 27 कार्यों का लक्ष्य दिया गया था। इनमें से 13 कार्य पूरे हो चुके हैं और 8 कार्य प्रगति पर हैं।

गाद-मुक्त होने के कारण जल निकायों के पुनरुद्धार से खरीफ और रबी दोनों फसलों के उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद है। जलाशयों की यह बढ़ी हुई क्षमता आने वाले समय में जल संकट से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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