

Pune Municipal Corporation Water Crisis: पुणे शहर में लगातार गहराते जल संकट को लेकर पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। बढ़ती आबादी, जल रिसाव और असमान वितरण के कारण नागरिकों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। मनपा आयुक्त नवल किशोर राम ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार करते हुए माना है कि प्रशासन पानी की लीकेज और बबर्बादी को पूरी तरह रोकने में विफल रहा है।
शहर की आबादी करीब 76 लाख पहुंच चुकी है, जिसके कारण मई में ही संकट स्पष्ट होने के बाद जून से जल कटौती लागू की गई है। जलापूर्ति विभाग के प्रमुख नंदकिशोर जगताप के अनुसार, जलापूर्ति शुरू होते ही सभी क्षेत्रों में एक साथ मांग बढ़ने से टंकियां खाली हो जाती हैं और व्यवस्था पर अतिरिक्त दवाव पड़ता है। हालांकि, रास्ता पेठ, डेक्कन और सातारा रोड जैसी जगहों की शिकायतों का निपटारा किया गया है और टैंकरों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं, नगरसेवक प्रशांत जगताप ने आरोप लगाया कि सूखे की पूर्व जानकारी होने के बाद भी पेयजल के बजाय गर्मी में कृषि के लिए पानी छोड़ा गया। नगरसेवक गणेश बिडकर ने समस्याग्रस्त क्षेत्रों का अलग खाका तैयार कर वहां छोटे टैंकरों से जलापूर्ति करने की सलाह दी है। फिलहाल, अगले 15 दिनों तक राहत की उम्मीद कम है।
वहीं, नगरसेविका मानसी देशपांडे ने बताया कि कई आवासीय सोसायटियों और पहाड़ी क्षेत्रों में पानी नहीं पहुंच रहा है और अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। संकट से निपटने के लिए नगरसेवक काका चव्हाण ने धायरी में रियायती दरों पर टैंकर उपलब्ध कराने की मांग की। उपमहापौर परशुराम वाडेकर ने बताया कि कुछ क्षेत्र सात वर्षों से टैंकरों पर निर्भर हैं। उन्होंने समान वितरण के लिए रोजाना एक घंटे बिजली बंद रखने का अनोखा सुझाव दिया।