Gudegaon Sand Ghat: गुडेगांव रेतघाट में कथित अवैध रेत उत्खनन और शासन के करोड़ों रुपए के राजस्व से जुड़े मामले को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मुकुंद साखरकर ने 71 करोड़ 27 लाख 60 हजार रुपए का जुर्माना रद्द किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूरे मामले की एसआईटी से निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
साखरकर के अनुसार, दिसंबर 2025 के विधानसभा शीतकालीन अधिवेशन में गुडेगांव रेतघाट में कथित अवैध उत्खनन का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए 9 जनवरी को पवनी तहसीलदार ने संबंधित ठेकेदार पर 71 करोड़ 27 लाख 60 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था। 13 अगस्त को उपविभागीय अधिकारी ने यह आदेश रद्द कर दिया। साखरकर ने पूछा कि मंत्री के निर्देश पर लगाए गए जुर्माने को रद्द करने का अधिकार एसडीओ को किस नियम के तहत मिला।
उपलब्ध दस्तावेजों का हवाला देते हुए साखरकर ने बताया कि रेतघाट पर 14,130 ब्रास उत्खनन की अनुमति थी, जबकि संयुक्त पंचनामे में 34,600 ब्रास अतिरिक्त अथवा कथित अवैध उत्खनन दर्ज किया गया था। उन्होंने इस पूरे मामले में प्रशासनिक और तकनीकी जांच की मांग की।
साखरकर ने आरोप लगाया कि जिस कंपनी पर 71 करोड़ रुपए से अधिक का जुर्माना लगाया गया था, उसी कंपनी को 5 फरवरी को फिर रेतघाट का ठेका दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि पुराने जुर्माने की वसूली किए बिना नया ठेका कैसे दिया गया। कांग्रेस ने ठेका प्रक्रिया और मंजूरियों की जांच की मांग की है।
साखरकर ने कहा कि कथित अवैध उत्खनन की जानकारी के बाद 13 मई 2025 को ईटीएस सर्वे के लिए जिलाधिकारी को पत्र दिया गया था, लेकिन सर्वे नहीं कराया गया। उन्होंने ईटीएस सर्वे नहीं कराने के कारण और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की। उन्होंने मोहाड़ी, सिहोरा और गोबरवाही क्षेत्रों में अनुमति से अधिक मात्रा में रेत भंडारण किए जाने का आरोप लगाते हुए तत्काल जांच की मांग की। अवैध भंडारण पाए जाने पर रेत जब्त कर संबंधित लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की गई है।